कोरोनरी धमनी रोग के बारे में आपको क्या जानना चाहिए?

कोरोनरी धमनी रोग (CAD) एक ऐसी स्थिति है, जो हृदय को रक्त पहुँचाने वाली कोरोनरी धमनियों को प्रभावित करती है। कोरोनरी धमनी रोग में, प्लाक के जमा होने से आपकी एक या अधिक कोरोनरी धमनियाँ संकीर्ण हो जाती हैं या अवरुद्ध हो जाती हैं।

सीने में दर्द (एनजाइना), इस रोग का सबसे आम लक्षण है। उच्च कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और अन्य कारक जोखिम को बढ़ाते हैं। इससे दिल का दौरा पड़ सकता है, हृदयाघात या दिल की विफलता जैसी अन्य जटिलताओं का कारण भी बन सकता है।

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कोरोनरी धमनी रोग क्या है?

कोरोनरी धमनी रोग या कोरोनरी हृदय रोग, तब विकसित होता है, जब कोलेस्ट्रॉल धमनी की दीवारों पर जमा हो जाता है, जिससे प्लाक बनता है। ये प्लाक धमनियों को संकीर्ण कर सकते हैं, जिससे दिल तक खून का बहाव कम हो जाता है या फिर ये रक्त वाहिकाओं की दीवारों में सूजन और सख्ती पैदा कर सकते हैं। कभी-कभी खून का थक्का (Clot) बहाव में बाधा उत्पन्न कर सकता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

कोरोनरी धमनियां दिल की सतह पर रक्त वाहिकाओं का एक जाल बनाकर, दिल तक ऑक्सीजन-युक्त रक्त पहुंचाती हैं। धमनियों में रूकावट या सिकुड़न आ जाने पर दिल को ऑक्सीजन-युक्त पर्याप्त मात्रा रक्त नहीं मिल पाता है, खासकर शारीरिक गतिविधियों के दौरान।

आप कोरोनरी धमनी रोग के साथ कई वर्षों तक रह सकते हैं और जब तक आपको दिल का दौरा नहीं पड़ता तब तक कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। इसीलिए कोरोनरी धमनी रोग (CAD) एक “मूक हत्यारा” है।

CAD के अन्य नामों में कोरोनरी हृदय रोग (CHD) और इस्केमिक हृदय रोग शामिल हैं। अधिकांश लोग जब “हृदय रोग” शब्द का उपयोग करते हैं, तो उसका मतलब यही होता है।

कोरोनरी धमनी रोग कभी-कभी दिल का दौरा पड़ने का कारण बन सकता है।

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कोरोनरी धमनी रोग (CAD) के प्रकार क्या हैं?

कोरोनरी धमनी रोग (CAD) को दो मुख्य प्रकारों में बांटा जा सकता है, ऐसा खून के बहाव को रोकने वाले कारणों के आधार पर किया गया है। दिल की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए इन सभी प्रकारों के लिए अलग-अलग तरह की जांच और प्रबंधन योजना की ज़रूरत होती है।

कोरोनरी धमनी रोग के प्रकारों में शामिल हैं:

1. ऑब्सट्रक्टिव कोरोनरी धमनी रोग

यह कोरोनरी धमनी रोग का सबसे आम प्रकार है, इसमें कोलेस्ट्रॉल, फैट और कैल्शियम से बना प्लाक धीरे-धीरे कोरोनरी धमनियों में जमा होने लगता है, जिससे धमनियां काफी सख्त और संकरी हो जाती हैं या पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाती हैं।

प्लाक दिल तक खून के बहाव को कम कर देता है। अगर प्लाक फट जाता है, तो इससे रक्त का थक्का बन सकता है, जिससे सीने में दर्द और दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टर अवरुद्ध धमनी के हिस्से को प्रतिशत में मापते हैं (जैसे, 50% से ज़्यादा रूकावट को “ऑब्सट्रक्टिव कोरोनरी धमनी रोग” माना जाता है)।

2. नॉन-ऑब्सट्रक्टिव कोरोनरी धमनी रोग

नॉन-ऑब्स्ट्रक्टिव कोरोनरी धमनी रोग (CAD) का मतलब है, कि आपके दिल की मुख्य धमनियों में रूकावट 50% से कम है, लेकिन फिर भी खून का बहाव दिल तक ठीक से नहीं हो पाता।

इसमें प्लाक के बजाय, लक्षण धमनी की अंदरूनी परत के खराब होने (एंडोथेलियल डिसफंक्शन), या छोटी रक्त वाहिकाओं के ठीक से काम न करने (माइक्रोवैस्कुलर डिसफंक्शन) या धमनी में ऐंठन (आर्टरी स्पाज़्म) के कारण होती है।

यह कोरोनरी धमनी रोग के कई लक्षणों का कारण बन सकता है, जैसे सांस लेने में तकलीफ होना या सीने में दर्द होना। नॉन-ऑब्सट्रक्टिव कोरोनरी धमनी रोग किसी में भी विकसित हो सकता है, लेकिन यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक आम है।

कोरोनरी धमनी रोग कितना आम है?

कोरोनरी धमनी रोग (CAD) (जिसे अक्सर इस्केमिक हार्ट डिज़ीज़ भी कहा जाता है) दुनिया भर में मौत का सबसे बड़ा कारण है। जिससे 315 मिलियन से ज़्यादा लोग प्रभावित हैं, जो दुनिया की आबादी का लगभग 1.7% से 2% हिस्सा है।

दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों में से 15% से ज़्यादा मौतें इसी वजह से होती हैं; यानि हर 3 मौतों में से लगभग 1 मौत का कारण CAD है।

एशिया और अफ्रीका में इस बीमारी का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसकी मुख्य वजह चयापचय संबंधी जोखिम कारक जैसे उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर, मोटापा, धूम्रपान और खराब खान-पान है।

और हर साल दिल से जुड़ी बीमारियों के कारण लगभग 20 मिलियन लोगों की मौत होती है। इस बीमारी का 75% से ज़्यादा बोझ कम और मध्यम आय वाले देशों में देखा जाता है।

कोरोनरी धमनी रोग भारत में एक बड़ी महामारी है, जो शहरी आबादी के लगभग 9% – 10% और ग्रामीण आबादी के 4% – 6% हिस्से को प्रभावित करती है। यह मौत का सबसे बड़ा कारण है; देश में वयस्कों की कुल मौतों में से लगभग एक-चौथाई मौतें दिल से जुड़ी बीमारियों (कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज़) के कारण होती हैं।

कोरोनरी धमनी रोग किसे प्रभावित करता है?

कोरोनरी धमनी रोग (CAD) मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करती है, जिनमें उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर, मधुमेह, क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ और मोटापा जैसे जोखिम कारक होते हैं। यह बीमारी ज़्यादातर उम्रदराज़ लोगों—खासकर 45 साल से ज़्यादा उम्र के पुरुषों और 55 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को प्रभावित करती है या उन लोगों को जिनके परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास रहा है।

CAD तब होती है, जब दिल तक खून पहुँचाने वाली धमनियों में प्लाक जमा हो जाता है, जिससे ज़रूरी खून का बहाव और ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है।

हालाँकि, उम्र और आनुवंशिकी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं, लेकिन जीवनशैली से जुड़ी आदतें जैसे बहुत ज़्यादा तनाव, स्लीप एपनिया और बहुत ज़्यादा शराब पीना, सिगरेट पीना, ज्यादा फैटी खाना खाना और व्यायाम न करना इस बीमारी को तेज़ी से बढ़ाती हैं।

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कोरोनरी धमनी रोग का कारण क्या है?

कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ (CAD) मुख्य रूप से एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण होती है—इसमें कोरोनरी धमनियों में कोलेस्ट्रॉल, फैट और प्लाक धीरे-धीरे जमा होकर धमनियों को संकरा बना देते हैं, जिससे दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन से भरपूर ज़रूरी खून का बहाव रुक जाता है।

उच्च कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह जैसी पहले से मौजूद बीमारियों और धमनियों को होने वाली क्षति, प्लाक के जमाव का कारण बन सकती हैं; जिससे कोरोनरी धमनी रोग हो सकता है। इस बीमारी के कई और जोखिम कारक भी हैं।

धमनियों में प्लाक का जमाव (एथेरोमा) एक चिपचिपा और धीरे-धीरे बढ़ने वाला जमाव है, जो धमनियों की दीवारों के अंदर बनता है। इसमें मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल, फैट, सूजन पैदा करने वाली कोशिकाएं, कोशिकीय अपशिष्ट, फाइब्रिन और कैल्शियम होते हैं। जो समय के साथ जमा होकर सख्त हो जाता है और धमनियों को सिकोड़ देता है, जिससे ऑक्सीजन से भरपूर खून का बहाव कम या रुक जाता है।

यदि प्लाक के टुकड़े टूटकर अलग हो जाते हैं या फट जाते हैं, तो उस जगह पर प्लेटलेट्स जमा हो जाते हैं, जिससे रक्त का थक्का बन जाता है। रक्त के थक्के धमनी को अवरुद्ध कर सकते हैं और रक्त प्रवाह को कम या अवरुद्ध कर सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप दिल का दौरा पड़ सकता है।

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कोरोनरी धमनी रोग के जोखिम कारक क्या हैं?

कोरोनरी धमनी रोग के विकसित होने में कई जोखिम कारक योगदान देते हैं। इनमें से कुछ कारकों पर आपका कोई नियंत्रण नहीं होता। लेकिन कुछ कारकों को आप जीवनशैली में बदलाव करके या दवाओं के उपयोग से नियंत्रित करने में सक्षम हो सकते हैं।

आपको जोखिम कारक जितने अधिक होंगे, कोरोनरी धमनी रोग विकसित होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। जोखिम कारकों में निम्न शामिल हैं:

  • उम्र: उम्र बढ़ने से धमनियों के क्षतिग्रस्त और संकुचित होने से, कोरोनरी धमनी रोग का खतरा भी बढ़ जाता है। पुरुषों में 45 साल की उम्र के बाद और महिलाओं में 55 साल की उम्र के बाद खतरा ज़्यादा होता है।
  • लिंग: आमतौर पर पुरुषों को कोरोनरी धमनी रोग का खतरा अधिक होता है। हालाँकि, रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं के लिए जोखिम बढ़ जाता है।
  • पारिवारिक इतिहास: हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास आपको कोरोनरी धमनी रोग होने की अधिक संभावना बनाता है। विशेष रूप से, यदि किसी करीबी रिश्तेदार (माता-पिता, भाई-बहन) को कम उम्र में हृदय रोग हो गया हो। जोखिम सबसे अधिक है, यदि आपके पिता या भाई को 55 वर्ष से कम आयु में या आपकी माँ या बहन को 65 वर्ष से कम आयु में यह विकसित हुआ हो।
  • धूम्रपान: यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे तुरंत छोड़ दें। धूम्रपान दिल की सेहत के लिए हानिकारक है। धूम्रपान करने वाले लोगों में हृदय रोग होने का जोखिम काफी अधिक होता है। दूसरों के छोड़े धुएं (सेकंडहैंड स्मोक) के संपर्क में आने से भी खतरा बढ़ जाता है।
  • उच्च रक्तचाप: अनियंत्रित उच्च रक्तचाप धमनियों को सख्त और कठोर (धमनी कठोरता) बना सकता है। कोरोनरी धमनियां संकीर्ण हो सकती हैं, जिससे रक्त प्रवाह धीमा हो सकता है।
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल: रक्त में बहुत अधिक खराब कोलेस्ट्रॉल एथेरोस्क्लेरोसिस के खतरे को बढ़ा सकता है। खराब कोलेस्ट्रॉल को लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। पर्याप्त अच्छा कोलेस्ट्रॉल नहीं – जिसे हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (HDL) कहा जाता है और इसकी कमी से भी एथेरोस्क्लेरोसिस हो सकता है।
  • मधुमेह: मधुमेह से कोरोनरी धमनी रोग का खतरा बढ़ जाता है। टाइप 2 मधुमेह और कोरोनरी धमनी रोग में कुछ जोखिम कारक एक जैसे होते हैं, जैसे मोटापा और उच्च रक्तचाप।
  • अधिक वजन या मोटापा: शरीर का ज़रूरत से ज़्यादा वजन पूरी सेहत के लिए हानिकारक है। मोटापा टाइप 2 मधुमेह और उच्च रक्तचाप का कारण बन सकता है।
  • क्रोनिक किडनी रोग: लंबे समय तक किडनी की बीमारी बने रहने से कोरोनरी धमनी रोग का खतरा बढ़ जाता है।
  • पर्याप्त व्यायाम न करना: अच्छे स्वास्थ्य के लिए शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण है। व्यायाम की कमी (गतिहीन जीवनशैली) कोरोनरी धमनी रोग और इसके कुछ जोखिम कारकों से जुड़ी हुई है।
  • बहुत अधिक तनाव: भावनात्मक तनाव धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है और कोरोनरी धमनी रोग के अन्य जोखिम कारकों को खराब कर सकता है।
  • अस्वास्थ्यकर आहार: बहुत अधिक संतृप्त वसा, ट्रांस वसा, नमक और चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करने से, कोरोनरी धमनी रोग का खतरा बढ़ सकता है।
  • शराब का सेवन: बहुत ज़्यादा शराब पीने से दिल की मांसपेशियों को नुकसान हो सकता है। यह कोरोनरी धमनी रोग के अन्य जोखिम कारकों को भी खराब कर सकता है।
  • नींद की मात्रा: बहुत कम या बहुत अधिक नींद लेना, दोनों ही स्थितियों में दिल की बीमारी होने का जोखिम बढ़ जाता है।

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जोखिम कारक अक्सर एक साथ होते हैं और एक दूसरे को बढ़ावा दे सकता है।

जब कुछ जोखिम कारक एक साथ हों, तो आपको कोरोनरी धमनी रोग होने की संभावना और भी बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, मेटाबोलिक सिंड्रोम — जिसमें उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त शर्करा, कमर के आसपास ज़्यादा चर्बी और उच्च ट्राइग्लिसराइड स्तर जैसी स्थितियां, कोरोनरी धमनी रोग के खतरे को बढ़ाते हैं।

कभी-कभी कोरोनरी धमनी रोग बिना किसी प्रमुख जोखिम कारक के भी हो सकती है। कोरोनरी धमनी रोग के अन्य संभावित रिस्क फ़ैक्टर में ये शामिल हो सकते हैं:

  • ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया: इस स्थिति के कारण नींद के दौरान सांस कभी रूकती है और चलने लगती है। इससे रक्त में ऑक्सीजन के स्तर में अचानक गिरावट आ सकती है। जिससे हृदय को अधिक परिश्रम करना पड़ता है, फलस्वरूप रक्तचाप बढ़ जाता है।
  • हाई-सेंसिटिविटी C-रिएक्टिव प्रोटीन (hs-CRP): जब शरीर के किसी हिस्से में सूजन होती है, तो इस प्रोटीन का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। hs-CRP का बढ़ा हुआ स्तर दिल की बीमारियों के जोखिम का पता लगाने के लिए एक अहम बायोमार्कर का काम करता है।
  • उच्च ट्राइग्लिसराइड्स: यह रक्त में पाया जाने वाली एक प्रकार की वसा (लिपिड) है। इसका उच्च स्तर कोरोनरी धमनी रोग का खतरा बढ़ा सकता है, खासकर महिलाओं में।
  • होमोसिस्टीन: होमोसिस्टीन एक अमीनो एसिड है जिसका उपयोग शरीर प्रोटीन बनाने और ऊतक के निर्माण और उनके रखरखाव के लिए करता है। लेकिन होमोसिस्टीन का उच्च स्तर कोरोनरी धमनी रोग के खतरे को बढ़ा सकता है।
  • प्रीक्लेम्पसिया: गर्भावस्था की यह जटिल समस्या, उच्च रक्तचाप और मूत्र में प्रोटीन की वृद्धि का कारण बनती है। इससे बाद की ज़िंदगी में हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।
  • गर्भावस्था की अन्य जटिलताएँ: गर्भावस्था के दौरान कोरोनरी धमनी रोग दुर्लभ है, लेकिन इसके कारण गंभीर जोखिम भी होते हैं। रक्त की मात्रा एवं हृदय से निकलने वाले रक्त की मात्रा में वृद्धि होने से हृदय को ऑक्सीजन की आवश्यकता बढ़ जाती है। इसके कारण एंजाइना, हृदय विफलता या हृदयाघात हो सकता है।
  • कुछ स्व-प्रतिरक्षित बीमारियाँ: जिन लोगों को रुमेटीइड गठिया और ल्यूपस या अन्य सूजन संबंधी स्थितियां हैं, उनमें एथेरोस्क्लेरोसिस होने का जोखिम अधिक होता है।

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कोरोनरी धमनी रोग के लक्षण क्या हैं?

शुरुआती चरण में, हो सकता है कि आपको कोई लक्षण न दिखें। लेकिन जैसे-जैसे धमनियों में प्लाक जमा होता जाता है और हृदय की मांसपेशियों में रक्त का बहाव कम हो जाता है। जिससे आपको सांस लेने में तकलीफ या थकान महसूस हो सकती है, खासकर व्यायाम के दौरान।

कोरोनरी धमनी रोग का सबसे आम लक्षण सीने में दर्द (एनजाइना) है। कुछ लोग इसे सीने में जलन या पाचन संबंधी समस्या समझ लेते हैं।

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एनजाइना की स्थिति में, आपको सीने में बेचैनी महसूस होती है। आप कंधों, बांहों, पीठ या जबड़े में भी दर्द का अनुभव हो सकता है। आपको ऐसा महसूस हो सकता है:

  • स्थिर एनजाइना: यह सबसे आम लक्षण है। यह एक प्रकार का पूर्वनिर्धारित, बार-बार होने वाला सीने में दर्द या बेचैनी है, जो शारीरिक परिश्रम या भावनात्मक तनाव के कारण होता है। दर्द आमतौर पर आराम करने से या एनजाइना की दवा (नाइट्रोग्लिसरीन) लेने से ठीक हो जाता है। कुछ लोगों में, विशेषकर महिलाओं में, दर्द कम समय के लिए या तेज हो सकता है और गर्दन, बांह या पीठ में महसूस हो सकता है।
  • सीने में दर्द (एनजाइना): आपको सीने में दबाव या जकड़न महसूस हो सकती है, जो आपके कंधे, बांह, गर्दन, पीठ या जबड़े तक फैल सकती है। कुछ लोगों को ऐसा महसूस होता है जैसे कोई उनकी छाती पर बैठा है। ऐसा तब होता है, जब दिल की मांसपेशियों को ऑक्सीजन युक्त पर्याप्त खून नहीं मिल पाता। यह कोरोनरी धमनी रोग का एक चेतावनी देने वाला लक्षण है।
  • सांस लेने में कठिनाई: आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आप ठीक से सांस नहीं ले पा रहे हैं।
  • थकान: यदि हृदय आपके शरीर की ज़रूरतों के अनुसार पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पाता है, तो आप असामान्य रूप से थकान महसूस कर सकते हैं।
  • दिल का दौरा: पूरी तरह से अवरुद्ध कोरोनरी धमनी दिल के दौरे का कारण बनती है। दिल के दौरे के आम लक्षणों में सीने में ज़बरदस्त दर्द या दबाव, कंधे या बांह में दर्द, सांस लेने में तकलीफ और पसीना आना शामिल हैं।

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महिलाओं में CAD के लक्षण

महिलाओं को भी उपरोक्त लक्षण अनुभव हो सकते हैं, लेकिन उनमें इसकी संभावना भी अधिक होती है:

  • जी मिचलाना
  • उल्टी करना
  • पीठ दर्द
  • जबड़े का दर्द
  • सीने में दर्द महसूस किए बिना सांस फूलना

हालाँकि, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हृदय रोग विकसित होने का जोखिम अधिक होता है।

कोरोनरी धमनी रोग की जटिलताएं

  • सीने में दर्द (एनजाइना): जब कोरोनरी धमनियां संकीर्ण हो जाती हैं, तो हृदय को उस समय पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता है, जब उसे इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है – जैसे व्यायाम करते समय। इससे सीने में दर्द (एनजाइना) या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
  • दिल का दौरा: यदि कोलेस्ट्रॉल प्लाक फट जाए और रक्त का थक्का बन जाए, तो दिल का दौरा पड़ सकता है। थक्का रक्त के प्रवाह को अवरुद्ध कर सकता है। खून की कमी हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकती है। नुकसान कितना होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका इलाज कितनी जल्दी शुरू हुआ।
  • हार्ट फेलियर: हृदय में संकुचित धमनियां या उच्च रक्तचाप धीरे-धीरे हृदय को कमजोर या कठोर बना सकता है जिससे रक्त पंप करना कठिन हो जाता है। हृदय विफलता तब होती है, जब हृदय रक्त को उस तरह से पंप नहीं कर पाता, जैसा कि उसे करना चाहिए।
  • अनियमित दिल की धड़कन (अतालता): हृदय तक पर्याप्त रक्त न पहुंचने से दिल के सामान्य सिग्नलिंग में बदलाव आ सकता है, जिससे दिल की धड़कनें अनियमित हो जाती हैं।
  • कार्डियोजेनिक शॉक: दिल को बहुत ज़्यादा नुकसान पहुँचने से उसके लिए पर्याप्त मात्रा में खून पंप करना मुश्किल हो जाता है, जिससे रक्तचाप बहुत तेज़ी से और खतरनाक स्तर तक गिर जाता है।
  • कार्डियक अरेस्ट: गंभीर मामलों में, दिल की धड़कन में गंभीर अनियमितता या दिल को बहुत ज़्यादा नुकसान पहुँचने के कारण दिल अचानक धड़कना बंद कर सकता है; यह एक मेडिकल इमरजेंसी है।

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कोरोनरी धमनी रोग का निदान

कोरोनरी धमनी रोग का निदान करने के लिए, डॉक्टर आपका शारीरिक परीक्षण कर सकता है, आपके चिकित्सा इतिहास और लक्षणों के बारे में पूछ सकता है। कोरोनरी धमनी रोग का निदान करने के लिए परीक्षणों का आदेश भी दे सकता है। इन परीक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम: यह दर्द रहित परीक्षण हृदय की विद्युत गतिविधि को मापता है। इससे पता चल सकता है कि दिल कितनी तेज़ या धीमी गति से धड़क रहा है।
  • इकोकार्डियोग्राम: यह एक अल्ट्रासाउंड स्कैन है, जो धड़कते हुए दिल की निगरानी करता है। यह दिखा सकता है कि हृदय और हृदय वाल्वों के माध्यम से रक्त कैसे प्रवाहित होता है।
  • तनाव परीक्षण: इसमें ट्रेडमिल या ऐसी दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो दिल पर दबाव डालती है, ताकि यह पता चल सके कि सक्रिय रहने पर दिल कैसे काम करता है। डॉक्टर, इकोकार्डियोग्राम और न्यूक्लियर इमेजिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करके ये परीक्षण करते हैं; ताकि हृदय संबंधी समस्याओं का पता लगाया जा सके।
  • कोरोनरी कैथीटेराइजेशन: एक विशेषज्ञ कैथेटर के ज़रिए डाई इंजेक्ट करेगा, जिसे अक्सर पैर या हाथ की धमनी में डाला जाता है। यह डाई एक्स-रे पर संकरी जगहों या रुकावटों को दिखाती है।
  • सीटी स्कैन: ये डॉक्टर को धमनियों में वसा जमावों में कैल्शियम का पता लगाने और रूकावट या किसी भी हृदय संबंधी विसंगतियों की पहचान करने में मदद करते हैं।
  • रक्त परीक्षण: डॉक्टर रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर का पता लगाने के लिए रक्त परीक्षण का आदेश दे सकते हैं।

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कोरोनरी धमनी रोग का इलाज

कोरोनरी धमनी रोग का कोई इलाज नहीं है, लेकिन आप इस स्थिति को प्रबंधित करने के लिए कदम उठा सकते हैं – खासकर जीवनशैली से सम्बन्धित।

CAD के उपचार में आमतौर पर जीवनशैली में बदलाव करना शामिल होता है जैसे धूम्रपान न करना, स्वस्थ भोजन करना और नियमित व्यायाम करना। डॉक्टर इसे बढ़ने से रोकने के लिए दवाएँ भी लिख सकते हैं।

हालाँकि, कुछ लोगों को चिकित्सा प्रक्रियाओं से भी गुजरना पड़ सकता है।

दवाएं

कोरोनरी धमनी रोग के उपचार में कई तरह की दवाएं इस्तेमाल की जाती हैं। आमतौर पर इनका मकसद रक्तचाप कम करना, धमनियों को चौड़ा करना या खून के थक्के जमने से रोकना होता है।

कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इन दवाओं को लेना या बंद नहीं करना चाहिए, अन्यथा आपके लक्षण और बिगड़ सकते हैं।

कोरोनरी धमनी रोग के इलाज के लिए कई दवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • स्टैटिन और कोलेस्ट्रॉल की दवाएं: ये “खराब” कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करती हैं और धमनियों में प्लाक जमने से रोकती हैं।
  • एंटीप्लेटलेट्स (एस्पिरिन): ये खून को पतला करती हैं, ताकि प्लेटलेट्स आपस में न जुड़ें, जिससे खून के थक्के जमने और दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम होता है।
  • बीटा-ब्लॉकर्स: ये दिल की धड़कन और रक्तचाप को कम करती हैं, जिससे दिल पर काम का बोझ कम होता है और सीने में दर्द से बचाव होता है।
  • ACE इनहिबिटर्स और ARBs: ये रक्तचाप और दिल पर पड़ने वाले दबाव को कम करती हैं, जिससे कोरोनरी धमनी रोग को बदतर होने से बचाने में मदद मिलती है।
  • नाइट्रोग्लिसरीन (नाइट्रेट्स): ये कोरोनरी धमनियों को चौड़ा करती हैं, ताकि सीने में दर्द (एंजाइना) से राहत मिल सके और इसे रोका जा सके।
  • कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स: ये रक्त वाहिकाओं को आराम देती हैं और चौड़ा करती हैं, जिससे खून का बहाव बेहतर होता है और रक्तचाप कम होता है।
  • रैनोलज़ीन: यह दवा सीने में दर्द (एनजाइना) से पीड़ित लोगों की मदद कर सकती है। इसे बीटा ब्लॉकर के साथ या उसके बजाय निर्धारित किया जा सकता है।

चेतावनी: CAD के लिए दवाइयों की योजना हर मरीज़ के लिए अलग-अलग होती है। अपनी सेहत की ज़रूरतों के हिसाब से सही खुराक और तरीका जानने के लिए कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह लें।

सर्जरी या अन्य प्रक्रियाएं

यदि धमनियां बहुत संकीर्ण हो गई हैं या लक्षणों पर दवाओं का असर नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर अवरुद्ध धमनियों को खोलने या बदलने के लिए सर्जरी या अन्य प्रक्रियाएं कर सकते हैं।

बहुत दुर्लभ मामलों में, किसी व्यक्ति को हृदय प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो सकती है। हालाँकि, ऐसा तभी होता है, जब दिल को गंभीर क्षति हुई हो और इलाज काम न कर रहा हो।

अवरुद्ध धमनी को ठीक करने के लिए सर्जरी के कुछ विकल्प:

  • परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन (PCI): इसका दूसरा नाम कोरोनरी एंजियोप्लास्टी भी है, यह प्रक्रिया बंद हृदय धमनियों को खोलने के लिए की जाती है। एंजियोप्लास्टी के दौरान धमनी में एक छोटी तार की जाली वाली ट्यूब (स्टेंट) लगाई जाती है, जो धमनी को खुला रखने और दोबारा सिकुड़ने से रोकने में मदद करता है। कुछ स्टेंट धमनियों को खुला रखने में मदद करने के लिए धीरे-धीरे दवा छोड़ते हैं।
  • कोरोनरी धमनी बाईपास ग्राफ्ट सर्जरी (CABG): यह एक ओपन हार्ट सर्जरी है, हृदय में के प्रवाह को बहाल करने के लिए अवरुद्ध या संकुचित कोरोनरी धमनी के चारों ओर एक नया मार्ग बनाती है। यह आमतौर पर केवल उन लोगों में किया जाता है जिनकी कई कोरोनरी धमनियों में गंभीर रुकावट होती है।

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जीवनशैली और घरेलू उपचार

आप हमेशा के लिए कोरोनरी धमनी रोग को नहीं रोक सकते। ऐसा इसलिए है, क्योंकि कुछ जोखिम कारक आपके नियंत्रण से बाहर होते हैं। लेकिन अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करने से धमनियों को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है और कोरोनरी धमनी रोग को कम या धीमा किया जा सकता है।

आप निम्न कार्य करके कोरोनरी धमनी रोग के जोखिम को कम कर सकते हैं और इसे बदतर होने से रोक सकते हैं:

  • धूम्रपान बंद करें: धूम्रपान कोरोनरी धमनी रोग के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है। निकोटीन से रक्त वाहिकाएँ सिकुड़ जाती हैं और दिल को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  • रक्तचाप नियंत्रण में रखें: वयस्कों को कम से कम हर दो साल में अपने रक्तचाप की जांच करानी चाहिए। यदि आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है, तो आपको अधिक बार जांच की आवश्यकता हो सकती है।
  • पर्याप्त नींद लें: अधिकांश वयस्कों को 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद की आवश्यकता होती है। लेकिन कई लोगों को यह लक्ष्य असंभव नहीं तो कठिन जरूर लग सकता है। अपने हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक गुणवत्तापूर्ण नींद पाने के लिए रणनीतियां बनायें।
  • कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन: वयस्कों को 30 साल की उम्र में और उसके बाद कम से कम हर पांच साल में कोलेस्ट्रॉल परीक्षण कराना चाहिए। कुछ लोगों को अधिक बार जांच की आवश्यकता हो सकती है। अपने डॉक्टर से पूछें कि कोलेस्ट्रॉल स्तर क्या होना चाहिए।
  • रक्त शर्करा प्रबंधन: यदि आपको मधुमेह है, तो अपने रक्त शर्करा का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करने से कोरोनरी धमनी रोग के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • दिल को स्वस्थ रखने वाला खाना खाएं: फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज, फलियाँ और मेवे खूब खाएँ। संतृप्त वसा और ट्रांस वसा से बचें। नमक और चीनी कम करें। दिल को सेहतमंद रखने के लिए सप्ताह में एक या दो बार मछली का सेवन अवश्य करें।
  • शराब पीना कम करें: यदि आप शराब का सेवन करते हैं, तो कम मात्रा में पियें। महिलाओं को हर दिन एक ड्रिंक और पुरुषों को हर दिन दो ड्रिंक ही पीना चाहिए।
  • पैदल चलें: सप्ताह में कम से कम 150 मिनट का व्यायाम वजन को प्रबंधित करने और मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है, ये सभी कोरोनरी धमनी रोग के सभी जोखिम कारक हैं।
  • स्वस्थ वजन बनाए रखें: अधिक वजन होने से कोरोनरी धमनी रोग का खतरा बढ़ जाता है। वज़न को कम करने से कोरोनरी धमनी रोग के जोखिम कारकों को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • हृदय पुनर्वास: यदि आपकी हृदय शल्य चिकित्सा हुई है, तो आपका डॉक्टर शिक्षा, परामर्श और व्यायाम प्रशिक्षण का एक कार्यक्रम सुझा सकता है, जो आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए बनाया गया है।
  • तनाव का प्रबंधन करें: भावनात्मक तनाव को कम करने में मदद करने के तरीके खोजें। अधिक व्यायाम करना, सचेतनता का अभ्यास करना और सहायता समूहों के साथ जुड़कर आप अपने तनाव पर नियंत्रण पा सकते हैं।

कोरोनरी धमनी रोग के लिए नियमित चिकित्सा जांच महत्वपूर्ण है। क्योंकि, कुछ मुख्य जोखिम कारक जैसे उच्च कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप और मधुमेह के प्रारंभिक अवस्था में कोई लक्षण नहीं दिखते हैं। इसका पता जल्दी चलने पर आप इलाज जल्दी शुरू करते हैं, तो आप अपने दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

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डॉक्टर की सहायता कब लेनी चाहिए?

कोरोनरी धमनी रोग को प्रबंधित करने और हृदयाघात जैसी गंभीर जटिलताओं से बचने के लिए अपने कार्डियोलॉजिस्ट से बार-बार और नियमित रूप से परामर्श करना आवश्यक है। आपकी हेल्थकेयर टीम आपकी स्थिति पर नज़र रखेगी और आपकी सेहत की मौजूदा हालत के आधार पर इलाज में बदलाव करेगी।

अगर आपके सीने में होने वाले दर्द (एंजाइना) में कोई बदलाव आता है, आराम करते समय दर्द होता है या दर्द कुछ मिनट से अधिक समय तक बना रहे, तो आपको तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी आवश्यक है। इन गंभीर चेतावनी वाले संकेतों पर ध्यान दें:

  • सीने में तेज़, भारी या जकड़न वाला दर्द
  • सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ़
  • बाएं हाथ, गर्दन, जबड़े या पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द, सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होना
  • जी मिचलाना, चक्कर आना या अचानक ठंडा पसीना आना

यदि आपको लगता है कि आपको दिल का दौरा पड़ रहा है, तो तुरंत 112 या अपने स्थानीय आपातकालीन नंबर पर कॉल करें। यदि आपातकालीन चिकित्सा सेवायें आपकी पहुंच से दूर हैं, तो किसी नजदीकी अस्पताल का विकल्प चुनें। यदि आपके पास कोई मददगार नहीं है, तो खुद गाड़ी चलाकर डॉक्टरी सहायता तक पहुंचने की कोशिश करें।

आखिरी बात भी बहुत महत्वपूर्ण है…

कोरोनरी धमनी रोग तब होता है, जब हृदय की धमनियों के अंदर कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाता है। यह स्थिति हृदय को ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट का कारण बनती है। धमनियां भी सख्त हो जाती हैं और सूजन बढ़ जाती है।

CAD का इलाज करना मुश्किल हो सकता है और इससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा भी हो सकता है। हालाँकि, नियमित व्यायाम करने, पौष्टिक आहार लेने और तंबाकूजन्य उत्पादों का उपयोग बंद करके लोग कोरोनरी धमनी रोग (CAD) के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

अगर किसी को सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि ये लक्षण दिल का दौरा पड़ने का संकेत हो सकते हैं।

 

 

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Ashok Kumar
Ashok Kumar

नमस्कार दोस्तों,
मैं एक Health Blogger हूँ, और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के बारे में शोध-आधारित लेख लिखना पसंद करता हूँ, जो शिक्षाप्रद होने के साथ प्रासंगिक भी हों। मैं अक्सर Health, Wellness, Personal Care, Relationship, Sexual Health, और Women Health जैसे विषयों पर Article लिखता हूँ। लेकिन मेरे पसंदीदा विषय Health और Relationship से आते हैं।

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