महिलाओं में बांझपन: जानिए कारण, लक्षण और इलाज के तरीके

महिलाओं में बांझपन का मतलब है, गर्भनिरोधक का इस्तेमाल किए बिना एक साल तक कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण न कर पाना। यह स्थिति कई कारणों से हो सकती है, जिनमें हार्मोनल असंतुलन, शारीरिक बनावट से जुड़ी समस्याएं और जीवनशैली से जुड़ी आदतें भी शामिल हैं।

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महिला बांझपन, जिसे अक्सर “फीमेल फैक्टर” बांझपन भी कहा जाता है, तब होती है जब महिला को बांझपन की समस्या होती है। जोड़ों में बांझपन के मामलों में, एक-तिहाई कारण पुरुषों से जुड़े होते हैं और एक-तिहाई महिलाओं से जुड़े होते हैं और बाकी एक-तिहाई मामले कई कारकों के मेल से या अज्ञात होते हैं।

महिलाओं में बांझपन के कुछ कारणों को रोका जा सकता है। बांझपन के इलाज में अक्सर दवाएं, जीवनशैली में बदलाव, शल्य चिकित्सा और इन-विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF) शामिल होते हैं।

महिलाओं में बांझपन क्या है?

महिलाओं में बांझपन एक ऐसी स्थिति है, जिसमें महिला को गर्भवती होने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर आपकी उम्र 35 साल से ज़्यादा है और आप छह महीने से या आपकी उम्र 35 साल से कम है और आप एक साल से नियमित रूप से असुरक्षित तरीके से गर्भधारण करने की कोशिश कर रही हैं, तो आपको बांझपन की समस्या हो सकती है।

महिला के गर्भवती होने की क्षमता में उसकी उम्र सबसे अहम कारक होती है। आजकल कई महिलाएं गर्भवती होने में देरी करती हैं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ अंडाशय की स्वस्थ अंडे बनाने की क्षमता कम हो जाती है। इससे गुणसूत्र से जुड़ी गड़बड़ियों और गर्भ के न ठहरने का खतरा बढ़ जाता है।

बांझपन की समस्या पुरुषों और महिलाओं, दोनों के प्रजनन तंत्र को समान रूप से प्रभावित करती है। महिला बांझपन के आम कारणों में उम्र, हार्मोनल असंतुलन, चिकित्सा स्थिति और जीवनशैली या पर्यावरण से जुड़े कारक शामिल हैं।

लगभग एक-तिहाई मामलों में बांझपन महिलाओं से जुड़ा होता हैं, और एक-तिहाई मामले महिला और पुरुष दोनों से जुड़े होते हैं। बाकी मामलों में या तो कारण पता नहीं होता या फिर पुरुष और महिला दोनों से जुड़ी समस्याओं का मिला-जुला असर होता है।

महिलाओं में बांझपन के कारणों का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। बांझपन के कारण के आधार पर इसके कई इलाज मौजूद हैं। कई बांझ जोड़े बिना किसी इलाज के भी बच्चे को जन्म दे पाते हैं।

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महिला बांझपन के प्रकार क्या हैं?

महिला बांझपन की दो मुख्य श्रेणियां हैं:

  1. प्राथमिक बांझपन: यह तब होता है, जब आप अपनी उम्र के आधार पर तय समय तक कोशिश करने के बावजूद कभी गर्भधारण नहीं कर पाती हैं।
  2. माध्यमिक बांझपन: इस प्रकार के बांझपन का पता तब चलता है, जब आप कम से कम एक सफल गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद दोबारा गर्भधारण नहीं कर पाती हैं।

महिला बांझपन कितना आम है?

महिलाओं में बांझपन एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है।

कम से कम 10% महिलाएं किसी न किसी प्रकार के बांझपन से जूझ रही हैं। उम्र के साथ बांझपन की संभावना बढ़ जाती है। दुनिया भर में प्रजनन की उम्र वाली लगभग 11 करोड़ महिलाएँ बांझपन से प्रभावित हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग हर 6 में से 1 वयस्क (वयस्क आबादी का 17.5%) को अपने जीवनकाल में बांझपन का सामना करना पड़ता है।

दुनिया भर में लगभग 15% जोड़े बांझपन का अनुभव करते हैं, जिसमें महिलाओं से जुड़े कारण लगभग 50% मामलों में हैं, तो वहीं पुरुषों से जुड़े कारण 40% मामलों में हैं और बाकी मामलों के लिए दोनों से जुड़े कारण ज़िम्मेदार होते हैं।

भारत में बच्चे पैदा करने की उम्र वाले जोड़ों में बांझपन की कुल दर लगभग 8% से 19% है, जिसमें महिलाओं से जुड़े कारण कुल मामलों का लगभग 40% से 50% हिस्सा हैं।

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महिलाओं में बांझपन के आम कारण

महिलाओं में बांझपन कई वजहों से हो सकता है। हर कारण को समझना ज़रूरी है, ताकि यह पता चल सके कि वे प्रजनन क्षमता पर कैसे असर डाल सकते हैं।

  • ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्याएं: अंडोत्सर्ग संबंधी समस्याओं के कारण अंडाशय (ओवरी) से अंडा निकलने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है या रुक सकती है। आम समस्याओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) और हाइपोथैलेमिक डिसफंक्शन शामिल हैं। इन समस्याओं के कारण मासिक धर्म चक्र अनियमित हो सकता है या मासिक धर्म नहीं भी हो सकता है।
  • फैलोपियन ट्यूब में क्षति: फैलोपियन ट्यूब को क्षति पहुँचने से अंडों के रास्ते में रुकावट आ सकती है। यह क्षति पेल्विक इंफ्लेमेटरी बीमारी, एंडोमेट्रियोसिस या पहले हुई सर्जरी की वजह से हो सकती है। निशान, रुकावट या चिपकाव अंडे की गर्भाशय तक की यात्रा में बाधा डाल सकते हैं।
  • एंडोमेट्रियोसिस: एंडोमेट्रियोसिस तब होता है, जब गर्भाशय की परत जैसा ऊतक गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है। इससे मासिक धर्म के दौरान दर्द हो सकता है और ओवरी, गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब के काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। इस ऊतक की वजह से अक्सर सूजन और घाव के निशान के ऊतक बन जाते हैं, जिससे गर्भधारण करने की क्षमता में दिक्कतें आ सकती हैं।
  • गर्भाशय या ग्रीवा संबंधी असामान्यताएं: गर्भाशय या गर्भाशय ग्रीवा में असामान्यताएं प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इनमें पॉलीप्स, फाइब्रॉएड या संरचनात्मक विसंगतियाँ शामिल हो सकती हैं। गर्भाशय ग्रीवा का संकरा होना या गर्भाशय की बनावट में खराबी जैसी समस्याएं गर्भधारण करने या गर्भावस्था को पूरा करने की क्षमता में बाधा डाल सकती हैं।
  • उम्र से जुड़े कारक: महिला की उम्र का प्रजनन क्षमता पर काफ़ी असर पड़ता है। उम्र बढ़ने के साथ, उसके अंडों की संख्या और गुणवत्ता कम हो जाती है। 35 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं में अक्सर गर्भवती होने की क्षमता कम हो जाती है और गर्भपात का ख़तरा भी बढ़ जाता है।
  • जीवनशैली से जुड़े कारक: जीवनशैली से जुड़ी कुछ आदतें बांझपन का कारण बन सकती हैं। धूम्रपान, बहुत ज़्यादा शराब का सेवन, मोटापा और बहुत तेज़ी से वज़न कम होना जैसी चीज़ें प्रजनन क्षमता पर बुरा असर डाल सकती हैं। एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है।
  • अस्पष्टीकृत बांझपन: कभी-कभी, पूरी जांच के बावजूद बांझपन का कोई खास कारण पता नहीं चल पाता है। इसे अस्पष्टीकृत बांझपन कहा जाता है। इसमें प्रजनन क्षमता से जुड़ी ऐसी बारीक समस्याएं हो सकती हैं, जिनका पता मौजूदा जांच के तरीकों से नहीं चल पाता।
  • हार्मोनल असंतुलन: हार्मोनल असंतुलन प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकता है। थायरॉइड की समस्या, प्रोलैक्टिन का बढ़ा हुआ स्तर या इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी दिक्कतें ओव्यूलेशन और मासिक धर्म चक्र में रुकावट डाल सकती हैं।
  • आनुवंशिक कारक: कुछ आनुवंशिक कारणों से बांझपन हो सकता है। टर्नर सिंड्रोम या कुछ खास जीनों में होने वाले बदलाव जैसी स्थितियां प्रजनन स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। ऐसे मामलों में वंशानुगत परीक्षण की सलाह दी जा सकती है।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली के विकार: स्व-प्रतिरक्षित रोग शरीर को उसके अपने प्रजनन ऊतकों पर हमला करने के लिए उकसाकर प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकती हैं। ल्यूपस या रुमेटॉयड आर्थराइटिस जैसी बीमारियाँ गर्भधारण या गर्भ का ठहरने के लिए प्रतिकूल माहौल बना सकती हैं।

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महिलाओं में बांझपन के लक्षण

महिला बांझपन का मुख्य लक्षण नियमित और असुरक्षित यौन संबंध के एक वर्ष के बाद भी गर्भधारण करने में असमर्थता है। महिलाओं में बांझपन के लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • अनियमित मासिक धर्म चक्र: मासिक धर्म चक्र की अवधि में काफ़ी अंतर होना, या तो बहुत छोटा (21 दिन से कम) या बहुत लंबा (35 दिन से अधिक) होना, ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है, जिससे प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है।
  • मासिक धर्म का न होना: अगर आपको 3 महीने या उससे ज़्यादा समय तक पीरियड्स नहीं आते हैं (गर्भावस्था को छोड़कर), तो यह ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है, जिससे गर्भधारण करने में दिक्कतें आ सकती हैं।
  • दर्दनाक माहवारी: पीरियड्स के दौरान बहुत ज़्यादा ऐंठन या पेड़ू में दर्द होना एंडोमेट्रियोसिस या पेल्विक इंफ्लेमेटरी बीमारी जैसी समस्याओं का संकेत हो सकता है, जो प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकती हैं।
  • मासिक धर्म में अत्यधिक रक्तस्राव: माहवारी के दौरान सामान्य से ज़्यादा रक्तस्राव होना फ़ाइब्रॉएड या हार्मोनल असंतुलन जैसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है, जो आपके गर्भवती होने की क्षमता पर असर डाल सकती हैं।
  • हार्मोनल असंतुलन: बिना किसी स्पष्ट कारण के वज़न बढ़ना, ज्यादा मुँहासे होना, बालों का पतला होना या चेहरे पर बहुत ज़्यादा बाल उगना जैसे लक्षण हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकते हैं, जो ओव्यूलेशन और गर्भधारण में बाधा डाल सकते हैं।
  • दर्दनाक संभोग: संभोग के दौरान दर्द होना (डिस्पेर्यूनिया) सामान्य बात नहीं है, किसी अन्तर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है, जो महिला की प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचा सकती है। यह पेल्विक इन्फेक्शन या पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों का असामान्य रूप से तंग होने का संकेत हो सकता है।
  • एक से अधिक बार गर्भपात: बार-बार होने वाले गर्भपात (लगातार तीन या उससे अधिक) एक अंतर्निहित प्रजनन समस्या का लक्षण हो सकता है, जिसके लिए चिकित्सा जांच और उपचार की ज़रूरत होती है।

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महिलाओं में बांझपन के जोखिम कारक क्या हैं?

कई चीज़ें आपकी फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) पर असर डाल सकती हैं।

  • उम्र: उम्र एक अहम कारक है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ प्रजनन क्षमता स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है। 35 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं में गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।
  • जीवनशैली: जीवनशैली से जुड़ी आदतें भी प्रजनन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। धूम्रपान, बहुत ज़्यादा शराब पीना और खराब खान-पान, सभी प्रजनन स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। कम वज़न या ज़्यादा वज़न होने से हार्मोन के स्तर और ओव्यूलेशन में गड़बड़ी हो सकती है।
  • अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याएं: कुछ स्वास्थ्य स्थितियां जैसे एंडोमेट्रियोसिस और पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) प्रजनन अंगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे प्रजनन क्षमता कम हो जाती है। मधुमेह या स्व-प्रतिरक्षित रोग जैसी पुरानी बीमारियां भी आपके गर्भधारण की संभावनाओं पर असर डाल सकती हैं।
  • पर्यावरणीय कारक: पर्यावरण में मौजूद ज़हरीले पदार्थों जैसे कीटनाशक, लेड और औद्योगिक रसायनों के संपर्क में आने से प्रजनन कार्य प्रभावित हो सकते हैं। काम से जुड़े जोखिम या हानिकारक पदार्थों के संपर्क में लंबे समय तक रहने से बांझपन का खतरा बढ़ सकता है।
  • तनाव: तनाव एक और कारक है, जो प्रजनन से जुड़े कार्य को प्रभावित कर सकता है। तनाव का उच्च स्तर हार्मोन उत्पादन में बाधा डालकर आपके शरीर की गर्भधारण करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
  • अनुवांशिक कारक: महिलाओं में बांझपन का पारिवारिक इतिहास भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। यदि आपके परिवार में बांझपन के मामले रहे हैं, तो आपको इसका खतरा अधिक हो सकता है।
  • यौन इतिहास: क्लैमाइडिया और गोनोरिया जैसे यौन संचारित संक्रमण (STI) फैलोपियन ट्यूब को नुकसान पहुंचा सकते हैं। असुरक्षित यौन संबंध बनाने से यौन संचारित संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जो बाद में प्रजनन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है।
  • दवाएं: विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए ली जाने वाली कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जो आपकी जननक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। यदि आप गर्भधारण की योजना बना रही हैं, तो विकल्पों के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

महिलाओं की उम्र बांझपन पर कैसे असर डालती है?

महिलाओं में जन्म से ही अंडों की एक सीमित संख्या होती है। उम्र बढ़ने के साथ, इन अंडों की संख्या और गुणवत्ता कम होने लगती है, जिससे आपके गर्भवती होने की संभावना कम हो जाती है।

शोध से पता चलता है कि महिलाओं में उम्र बांझपन का एक आम कारण बनती जा रही है, क्योंकि कई जोड़े 30 या 40 की उम्र तक बच्चे पैदा करने का इंतजार कर रहे हैं।

महिलाओं के लिए बच्चे पैदा करने की सबसे अच्छी उम्र 20 से 30 साल के बीच होती है। 30 की उम्र के बाद प्रजनन क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और यह गिरावट 35 की उम्र के बाद और तेज़ हो जाती है।

40 साल की उम्र आते-आते प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना काफी कम हो जाती है। इसके कई कारण हैं:

  • अंडे की गुणवत्ता: उम्र बढ़ने के साथ अंडों में गुणसूत्र से संबंधित असामान्यताएं होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • डिम्बग्रंथि रिज़र्व: समय के साथ डिम्बग्रंथि में आरक्षित अंडों की संख्या कम हो जाती है।
  • शारीरिक स्थिति: उम्र बढ़ने के साथ एंडोमेट्रियोसिस और फैलोपियन ट्यूब (गर्भ नली) से संबंधित रोग या विकार जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

उम्र के अनुसार महिलाओं की प्रजनन क्षमता के आंकड़े

यहाँ नीचे बताया गया है कि महिलाओं की गर्भधारण क्षमता पर उम्र कैसे असर दिखाती है:

उम्र हर महीने गर्भधारण की संभावना
20-24 साल लगभग 25%
30-34 साल करीब 20%
35-39 साल लगभग 15%
40+ साल 5% से कम

महिलाओं में बाँझपन की जटिलताएँ

ज़्यादा उम्र की महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान कई जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है, जिसका असर माँ और बच्चे दोनों पर पड़ सकता है। इन जोखिमों में गर्भावस्था के दौरान होने वाली मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटीज़), उच्च रक्तचाप और गर्भपात की संभावना शामिल है।

इस स्थिति से जुड़े शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों के साथ ही बांझपन का इलाज और प्रजनन से जुड़ी अंदरूनी समस्याओं के जोखिम भी जुड़े हैं। जिनमें शामिल हैं:

  • चिंता और डिप्रेशन: गर्भधारण न कर पाने की हताशा अक्सर चिंता, तनाव और अवसाद का कारण बनती है।
  • रिश्तों में तनाव: गर्भधारण की लंबे समय तक चलने वाली कोशिशों से साथी पर दबाव और रिश्तों में तनाव पैदा कर सकता है।
  • सामाजिक असर: बाँझपन का सामना कर रहे लोगों को अकेलेपन या भावनात्मक परेशानी झेलनी पड़ सकती हैं।
  • प्रजनन दवाओं के दुष्प्रभाव: प्रजनन दवाओं की प्रतिक्रिया से पेट फूलना, दर्द और गंभीर मामलों में खून के थक्के जमना या किडनी की समस्याएँ हो सकती हैं।
  • एकाधिक गर्भावस्था: सहायक प्रजनन तकनीक से जुड़वाँ या एक से ज़्यादा बच्चों के गर्भ में पलने की संभावना बढ़ जाती है।
  • अस्थानिक गर्भावस्था: निषेचित अंडा गर्भाशय के बाहर, आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब में प्रत्यारोपित होने का जोखिम ज़्यादा होता है।
  • गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं: बांझपन का कारण बनने वाली स्थितियाँ, गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप और भ्रूण के विकास में रुकावट बन सकती हैं।
  • शल्य चिकित्सा से जुड़े जोखिम: बाँझपन के इलाज के लिए की जाने वाली सर्जरी प्रक्रियाओं में रक्तस्राव और संक्रमण का थोड़ा जोखिम होता है।

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महिलाओं में बाँझपन का निदान

महिलाओं में बांझपन का पता लगाने के लिए कई परीक्षण किए जा सकते हैं। हर परीक्षण प्रजनन स्वास्थ्य के अलग-अलग पहलुओं की जाँच करता है। नीचे कुछ परीक्षण की जानकारी दी गई है:

  • ओव्यूलेशन टेस्टिंग: यह देखने के लिए हर 21वें दिन प्रोजेस्टेरोन के स्तर की जाँच की जाती है, कि प्रोजेस्टेरोन का स्तर सामान्य है या कम है।
  • हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी (HSG): यह एक एक्स-रे परीक्षण है, जिसमें गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब में रुकावट या किसी तरह की असामान्यता का पता लगाने की जाँच की जाती है।
  • ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड: इसे एंडोवेजाइनल अल्ट्रासाउंड भी कहा जाता है, एक प्रकार का आंतरिक इमेजिंग परीक्षण है। इसमें महिला के प्रजनन अंगों की स्पष्ट तस्वीरें लेने के लिए ध्वनि तरंगों प्रयोग करते हैं, इससे ओवेरियन सिस्ट या गर्भाशय फाइब्रॉएड जैसी समस्याओं का पता चल सकता है।
  • डिम्बग्रंथि रिजर्व परीक्षण: एंटी-मुलेरियन हार्मोन (AMH) एक रक्त परीक्षण है, जो खून में AMH की मात्रा को मापता है, जिससे महिला के बचे हुए अंडों की संख्या और गुणवत्ता का पता लगाया जाता है।
  • हार्मोन परीक्षण: रक्त परीक्षण के ज़रिए FSH, LH और प्रोलैक्टिन जैसे हार्मोन के स्तर को मापा जाता है ताकि प्रजनन क्षमता पर असर डालने वाले हार्मोनल असंतुलन का पता लगाया जा सके।
  • लैप्रोस्कोपी: इसे आम भाषा में दूरबीन विधि या ‘की-होल सर्जरी’ कहा जाता है, जिसमें कैमरा डालने के लिए पेट में छोटा सा चीरा लगाया जाता है। इसमें एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थितियों के लिए श्रोणि (पेल्विक) अंगों की जाँच की जाती है।
  • हिस्टेरोस्कोपी: एक ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसके जरिए डॉक्टर कम से कम चीर-फाड़ के महिला के गर्भाशय (बच्चेदानी) के अंदरूनी हिस्से की जांच और उसका इलाज करते हैं।
  • आनुवंशिक परीक्षण: आनुवंशिक परीक्षण यह निर्धारित करने में मदद मिलती है कि क्या आपके जीन में कोई परिवर्तन है, जो बांझपन का कारण बन सकता है।

इन परीक्षणों की मदद से आपकी गर्भधारण करने की प्राकृतिक क्षमता के बारे में सही जानकारी मिल सकती है। आपके लिए सबसे सही परीक्षण कौन से होंगे, यह जानने के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।

महिलाओं में बांझपन का इलाज

महिलाओं में बांझपन का इलाज उसके कारण, उम्र और बांझपन की अवधि पर निर्भर करता है। क्योंकि, बांझपन एक जटिल समस्या है, इसलिए इसके इलाज में काफी पैसे, शारीरिक, मानसिक मजबूती के साथ-साथ समय भी देना पड़ता है।

आपके लिए सबसे अच्छा इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि बांझपन की असल वजह क्या है। प्रजनन क्षमता को बहाल करने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं, जो आपको गर्भवती होने में मदद कर सकते हैं। यहाँ कुछ आम इलाज के तरीके दिए गए हैं:

दवाएँ

ओव्यूलेशन को नियंत्रित या उत्तेजित करने वाली दवाओं को बांझपन के इलाज की दवाओं के रूप में जाना जाता है। ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्याओं के कारण जिन महिलाओं को बांझपन की समस्या होती है, उनके लिए प्रजनन संबंधी दवाएं मुख्य इलाज हैं।

प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं में शामिल हैं:

  • क्लोमीफीन साइट्रेट: इसका इस्तेमाल अक्सर अंडे बनने की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए किया जाता है। यह उन हार्मोन की मात्रा को बढ़ाकर काम करता है, जो परिपक्व अंडे के विकास और छूटने में मदद करते हैं।
  • गोनाडोट्रोपिन: ये इंजेक्शन के ज़रिए दिया जाने वाला एक हार्मोन है, जो अंडाशय को कई अंडे बनाने के लिए उत्तेजित करता है।
  • लेट्रोज़ोल: यह क्लोमीफीन के समान ही काम करती है। लेट्रोज़ोल का उपयोग आमतौर पर 39 वर्ष से कम उम्र की उन महिलाओं के लिए किया जाता है, जिन्हें PCOS है।
  • मेटफॉर्मिन: इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब इंसुलिन प्रतिरोध महिला बांझपन का ज्ञात या संभावित कारण हो। यह इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाने में मदद करता है, जिससे ओव्यूलेशन में सुधार हो सकता है।
  • ब्रोमोक्रिप्टिन: इसका इस्तेमाल तब किया जा सकता है, जब पिट्यूटरी ग्रंथि से प्रोलैक्टिन का ज़्यादा उत्पादन (हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया) होने के कारण ओव्यूलेशन की समस्याएँ होती हैं।

शल्य चिकित्सा उपचार

कई सर्जिकल प्रक्रियाओं से महिलाओं में बाँझपन से जुड़ी समस्याओं को ठीक किया जा सकता है या उसमें सुधार किया जा सकता है। हालाँकि, अन्य उपचारों की सफलता के कारण आजकल प्रजनन क्षमता के लिए सर्जरी बहुत कम की जाती है। इनमें शामिल हैं:

  • लैप्रोस्कोपिक सर्जरी: एंडोमेट्रियोसिस, श्रोणि (पेल्विस) के अंगों का आपस में चिपकने जैसी स्थितियों को ठीक करने या डिम्बग्रंथि अल्सर को हटाने के लिए बहुत छोटा चीरा लगाकर की जाने वाली शल्य चिकित्सा है।
  • हिस्टेरोस्कोपिक सर्जरी: प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाली पॉलीप्स और फाइब्रॉएड जैसी गर्भाशय स्थितियों का इलाज करने के लिए इस शल्य चिकित्सा का उपयोग किया जाता है।
  • ट्यूबल सर्जरी: यदि आपकी फैलोपियन ट्यूब अवरुद्ध हैं या उनमें तरल भरा हैं, तो आपका डॉक्टर जुड़े हुए ऊतकों को हटाने, ट्यूब को चौड़ा करने या एक नया मार्ग बनाने के लिए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की सिफारिश कर सकता है। यह सर्जरी दुर्लभ है, क्योंकि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) से गर्भावस्था दर की संभावना आमतौर पर बेहतर होती है।

सहायक प्रजनन तकनीक (ART)

  • इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF): आपकी अंडाशय से अंडे निकाल कर लैब में शुक्राणु के साथ निषेचित किए जाते हैं। इसके तैयार भ्रूण (एम्ब्रियो) को आपके गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।
  • इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI): निषेचन (फर्टिलाइज़ेशन) में मदद के लिए एक शुक्राणु को सीधे अंडे में प्रवेश कराया जाता है; यह तरीका खासकर तब सुझाया जाता है, जब पुरुष बाँझपन की समस्या भी एक कारण हो।

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जीवनशैली में बदलाव

  • वजन प्रबंधन: स्वस्थ वजन बनाए रखना बेहद जरूरी है। कम वजन वाली और अधिक वजन वाली, दोनों तरह की महिलाओं को ओव्यूलेशन में समस्या हो सकती है।
  • शराब और तंबाकू से परहेज: नियमित रूप से मादक पदार्थों के सेवन से प्रजनन क्षमता कम होती है, इसलिए ऐसी चीजों से परहेज करना ही बेहतर है।
  • हार्मोनल थेरेपी
    • प्रोजेस्टेरोन हार्मोन थेरेपी: गर्भधारण में मदद करनेभ्रूण के आरोपण के लिए गर्भाशय की परत को गर्भधारण में मदद करने के लिए अक्सर इन्हें दिया जाता है।
    • थायराइड हार्मोन थेरेपी: यदि थायराइड की समस्या प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही है, तो थायराइड हार्मोन की कमी को पूरा करने के लिए इसे दिया जाता है।

उपचार का चुनाव करते समय, अपनी स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त तरीका जानने के लिए किसी प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए आपका डॉक्टर इन उपचारों के संयोजन की सलाह दे सकता है।

महिला बाँझपन के उपचार की जटिलताएँ

बाँझपन के उपचार की जटिलताओं में मुख्य रूप से ओव्यूलेशन को प्रोत्साहित करने के लिए दवाओं के उपयोग से जुड़ी जटिलताएँ शामिल हैं। इन जटिलताओं में शामिल हैं:

  • एकाधिक गर्भधारण: मौखिक दवाओं से एकाधिक गर्भधारण का जोखिम अपेक्षाकृत कम (10% से कम) होता है और ज्यादातर जुड़वां गर्भधारण का ही जोखिम होता है। इंजेक्शन वाली दवाओं से यह संभावना 30% तक बढ़ जाती है। इंजेक्शन द्वारा दी जाने वाली प्रजनन दवाओं से भी तिगुने या उससे अधिक गर्भधारण का काफी जोखिम होता है।
  • डिम्बग्रंथि अतिउत्तेजना सिंड्रोम (OHSS): ओव्यूलेशन को प्रेरित करने के लिए प्रजनन दवाओं को लेने से डिम्बग्रंथि अतिउत्तेजना सिंड्रोम (OHSS) हो सकता है, हालांकि ऐसा बहुत कम होता है। इसके लक्षणों में अंडाशय में सूजन और दर्द शामिल है; ये लक्षण बिना इलाज के ही ठीक हो जाते हैं। इनमें पेट में हल्का दर्द, पेट फूलना, जी मिचलाना, उल्टी और दस्त शामिल हो सकते हैं।
  • डिम्बग्रंथि ट्यूमर के दीर्घकालिक जोखिम: प्रजनन संबंधी दवाएं लेने वाली अधिकांश महिलाओं पर हुए ज़्यादातर अध्ययनों से पता चलता है कि इससे लंबे समय में शायद ही कोई जोखिम होता है। हालांकि, कुछ अध्ययन बताते हैं कि जो महिलाएं बिना सफल गर्भावस्था के 12 महीने या उससे ज़्यादा समय तक बाँझपन की दवाएं लेती हैं, उन्हें बाद में बॉर्डरलाइन डिम्बग्रंथि ट्यूमर का जोखिम ज़्यादा हो सकता है।

महिला बांझपन की रोकथाम कैसे करें?

महिलाओं में बांझपन को रोका नहीं जा सकता। इसकी कई वजहें हो सकती है, इसलिए इससे बचने के तरीके भी अलग-अलग और कई तरह के हो सकते हैं। हालांकि कुछ वजहों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन जीवनशैली से जुड़ी कुछ आदतों में बदलाव और उपचार से इसके जोखिम को कम किया जा सकता है। बचाव के उपायों में शामिल हैं:

  • स्वस्थ आहार: विटामिन और खनिजों से भरपूर संतुलित आहार का सेवन प्रजनन स्वास्थ्य का समर्थन करता है।
  • नियमित व्यायाम: नियमित रूप से हल्के-फुल्के व्यायाम करने से स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद मिलती है, जो प्रजनन क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • तंबाकू और शराब से परहेज: ये नशीले पदार्थ प्रजनन कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
  • नियमित चिकित्सा जांच: PCOS या एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थितियों का शीघ्र पता लगाने और उपचार से प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाली जटिलताओं को रोका जा सकता है।
  • तनाव का प्रबंधन: दीर्घकालिक तनाव हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है, इसलिए प्रभावी तनाव प्रबंधन तकनीक आवश्यक है।
  • संक्रमण और STI: सुरक्षित यौन संबंध बनाने और नियमित जांच कराने से यौन संचारित संक्रमणों को रोका जा सकता है, जो बांझपन का कारण बन सकते हैं।

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बांझपन के साथ जीना और उससे जुड़ी भावनाओं को कैसे संभालें?

महिलाओं के लिए बांझपन के साथ जीना एक मुश्किल अनुभव हो सकता है। कई महिलाओं को दुख या कुछ खोने का एहसास होता है, जिससे उदासी, गुस्सा और निराशा जैसी कई भावनाएं पैदा हो सकती हैं। यह समझना ज़रूरी है कि ये भावनाएं सही हैं और मदद लेना फायदेमंद हो सकता है।

आम भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ

  • दुख: बांझपन के प्रति यह एक आम प्रतिक्रिया, जो रुक-रुक कर महसूस हो सकती है।
  • गुस्सा: यह खुद पर या दूसरों पर, जैसे साथियों या डॉक्टरों, निकाला जा सकता है।
  • चिंता: भविष्य को लेकर और इलाज के नतीजों की अनिश्चितता को लेकर चिंता।

भावनाओं को प्रबंधित करने की तरकीबें

  • सहायता लें: किसी सहायता समूह से जुड़ें या बांझपन में विशेषज्ञता वाले चिकित्सक से बात करें।
  • तनाव में कमी: योग, ध्यान और मन को काबू में रखने जैसे अभ्यास तनाव के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं।
  • अन्य विकल्पों पर विचार करें: बांझपन उपचार प्रक्रिया में जितनी जल्दी हो सके विकल्प निर्धारित करें – गोद लेना, दाता शुक्राणु या अंडाणु या यहां तक ​​कि कोई बच्चा न होना। इससे उपचार के दौरान चिंता और गर्भधारण न होने पर निराशा कम हो सकती है।

एक समर्थन समूह बनाना

भावनात्मक, व्यावहारिक या आर्थिक मदद के लिए एक मज़बूत समर्थन समूह का होना बहुत ज़रूरी है।

  • परिवार और दोस्त: उन लोगों का सहारा लें जिन पर आप भरोसा करते हैं और जो आपकी स्थिति को समझते हैं।
  • पेशेवर मदद: काउंसलर या थेरेपिस्ट आपको निष्पक्ष नज़रिया और मुश्किल हालात से निपटने के तरीके बता सकते हैं।
  • ऑनलाइन कम्युनिटीज़: फ़ोरम और ऑनलाइन सहायता समूह आपको ऐसे लोगों से जोड़ सकते हैं, जो आपके जैसे ही अनुभवों से गुज़र रहे हैं।

खुद का ख्याल रखने के तरीके

  • शारीरिक गतिविधि: नियमित व्यायाम करने से मनोदशा और सेहत में सुधार हो सकता है।
  • स्वस्थ खान-पान: शारीरिक और मानसिक सेहत, दोनों के लिए संतुलित आहार लेना ज़रूरी है।
  • शौक: ऐसे काम करें, जिनमें आपको मज़ा आता हो; इससे आपका ध्यान बंटेगा और आपको कुछ पाने का एहसास होगा।

डॉक्टर को कब दिखाएँ?

डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए, यह आपकी उम्र पर निर्भर कर सकता है:

  • 35 साल की उम्र तक, ज़्यादातर डॉक्टर सलाह देते हैं कि परीक्षण या इलाज शुरू करने से पहले कम से कम एक साल तक गर्भवती होने की कोशिश की जाए।
  • अगर आपकी उम्र 35 से 40 साल के बीच है, तो छह महीने तक कोशिश करने के बाद अपने डॉक्टर से अपनी चिंताओं के बारे में बात करें।
  • अगर आपकी उम्र 40 साल से ज़्यादा है, तो हो सकता है कि आपके डॉक्टर तुरंत परीक्षण या इलाज करवाने की सलाह दें।

अगर आपको या आपके साथी को प्रजनन क्षमता से जुड़ी कोई समस्या है, या आपको अनियमित या दर्दनाक मासिक धर्म, पेल्विक इंफ्लेमेटरी बीमारी, बार-बार गर्भपात, कैंसर का इलाज या एंडोमेट्रियोसिस की समस्या रही है, तो हो सकता है कि आपके डॉक्टर तुरंत परीक्षण या इलाज शुरू कर दें।

आखिरी बात भी बहुत महत्वपूर्ण है…

महिलाओं में बांझपन एक जटिल लेकिन आम समस्या है, जिसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे हार्मोनल असंतुलन, शारीरिक बनावट, जीवनशैली या किसी अन्तर्निहित स्वास्थ्य समस्या। हालांकि, इसके कारणों, लक्षणों और जांच के तरीकों को समझने से इसके सही इलाज में मदद मिल सकती है।

यदि आप 12 महीने से गर्भवती होने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है या यदि आपकी उम्र 35 वर्ष से अधिक है और कोशिश करते हुए छह महीने हो गए हैं, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

अच्छी बात यह है कि आजकल महिला बांझपन उपचार के कई विकल्प मौजूद हैं—जैसे दवाएं, जीवनशैली में बदलाव और IVF जैसी अत्याधुनिक तकनीकें, जो प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।

एक स्त्री रोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ आपके बाँझपन का कारण पता लगाने और उपचार योजना निर्धारित करने में आपकी मदद कर सकता है। ऐसे समय में सकारात्मक रहने का प्रयास करें, अधिकांश लोग सही उपचार से गर्भधारण करने में सक्षम होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

महिलाओं में बांझपन के आम कारण क्या हैं?

महिलाओं में बांझपन कई वजहों से हो सकता है, जैसे हार्मोन का असंतुलन, अंडे बनने की प्रक्रिया में दिक्कतें, प्रजनन अंगों की बनावट से जुड़ी समस्याएं और उम्र के साथ प्रजनन क्षमता में कमी।

महिलाओं में बांझपन की मुख्य चार वजहें क्या हैं?

महिलाओं में बांझपन के चार मुख्य कारण हैं: ओव्यूलेशन में दिक्कत (ओव्यूलेटरी डिसफंक्शन), ट्यूब में रुकावट (ट्यूब-ब्लॉकेज), एंडोमेट्रियोसिस और गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं।

महिला बांझपन की समस्या के लिए कौन-कौन से इलाज उपलब्ध हैं?

महिलाओं में बांझपन के लिए कई तरह के इलाज मौजूद हैं, जैसे ओव्यूलेशन को बढ़ावा देने वाली दवाएं, शारीरिक बनावट की समस्याओं को ठीक करने के लिए सर्जरी, IVF जैसी असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) और जीवनशैली में बदलाव।

महिलाओं में बांझपन का पता कैसे लगाया जाता है?

जांच में आमतौर पर कई परीक्षण शामिल होते हैं, जैसे हार्मोन के स्तर की जांच के लिए रक्त परीक्षण, अल्ट्रासाउंड या हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी जैसी इमेजिंग जांच, और कभी-कभी समस्याओं का पता लगाने के लिए एक्सप्लोरेटरी सर्जरी।

महिलाओं में बांझपन के क्या लक्षण हो सकते हैं?

लक्षणों में अनियमित माहवारी, दर्दनाक पीरियड्स, मासिक धर्म का न आना और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) या फाइब्रॉएड जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं।

महिलाओं को किस तरह के बांझपन का सामना करना पड़ सकता है?

महिलाओं को अलग-अलग तरह के बांझपन का सामना करना पड़ सकता है, जैसे प्राथमिक बांझपन (गर्भधारण करने में पूरी तरह से असमर्थ होना) और द्वितीयक बांझपन (पहले बच्चे को जन्म देने के बाद दोबारा गर्भधारण करने में कठिनाई होना)।

बांझपन का भावनात्मक और रिश्तों पर क्या असर पड़ सकता है?

बांझपन से भावनात्मक तनाव, चिंता और अवसाद (डिप्रेशन) हो सकते हैं। इलाज के दौरान आने वाली भावनात्मक और आर्थिक चुनौतियों के कारण वैवाहिक रिश्तों में भी तनाव पैदा हो सकता है।

 

 

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Female Infertility: Causes, Symptoms, and Treatment Options

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Ashok Kumar
Ashok Kumar

नमस्कार दोस्तों,
मैं एक Health Blogger हूँ, और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के बारे में शोध-आधारित लेख लिखना पसंद करता हूँ, जो शिक्षाप्रद होने के साथ प्रासंगिक भी हों। मैं अक्सर Health, Wellness, Personal Care, Relationship, Sexual Health, और Women Health जैसे विषयों पर Article लिखता हूँ। लेकिन मेरे पसंदीदा विषय Health और Relationship से आते हैं।

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