
20 गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ सर्दियों में रोज खाएं
“गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ” को सर्दियों के मौसम में अवश्य खाना चाहिए, इससे आपका प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर नहीं पड़ेगा और शरीर में गर्माहट भी बनी रहेगी। इसलिए ठंडी के मौसम में अपने आहार में गर्म तासीर के मसाले, फल, सूखे मेवे, सब्जियां और साबुत अनाज को अधिक से अधिक शामिल करना चाहिए।
तासीर में गर्म खाद्य पदार्थ शरीर को अंदर से गर्मी देते हैं, जो सर्दियों में विशेष रूप से फायदेमंद होते हैं। ये वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं और शरीर को गर्माहट प्रदान करते हैं। ये पाचन को सुधारते हैं, एनर्जी बढ़ाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं, लेकिन इनका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए।

आपको पता होना चाहिए, कि रोजमर्रा के खाये जाने वाले भोजन, फल और सब्जियों की तासीर गर्म या ठंडी दोनों तरह की होती है। बस हमें यह पता होना चाहिए, कि किस मौसम में कौन सी तासीर वाले खाद्य पदार्थ को प्रधानता दें।
आज का लेख सर्दियों में खाने के लिए गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ कौन-कौन से हैं, ताकि आप भी उन खाद्य पदार्थों की तासीर के बारे में पूरी तरह से जान सकें।
तासीर किसे कहते हैं?
जिस भोजन, फल, मेवा या सब्ज़ी को खाने के बाद शरीर पर उस खाद्य पदार्थ का ठंडा या गर्म प्रभाव महसूस हो, उसे उस खाद्य पदार्थ की तासीर (विशिष्टता/खासियत) कहते हैं।
उदाहरण के लिए, खीरा खाने के बाद हमारे शरीर को ठंडक महसूस होती है, तो खीरे की विशिष्टता ठंडी है। जबकि, अंडा खाने से शरीर में गर्माहट बढ़ जाती है, इसलिए कि अंडे की तासीर गर्म है।
मौसम के अनुसार ठंडे या गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ खायें
गर्मी में ठंडी तासीर वाला और ठंडी में गर्म तासीर वाला खाना शरीर के लिए फायदेमंद होता है। यदि आप इसके विपरीत करते हैं, मसलन सर्दी में ठंडी तासीर वाला और गर्मी में गर्म तासीर वाला भोजन करते हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
इसलिए सर्दियों मे गर्म और गर्मी में ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थ, जैसे मसाले, मेवे, फल और सब्जियों की मांग काफी बढ़ जाती है।
जिन लोगों को इस बारे में पता है, वे अपनी उम्र और सेहत के हिसाब से ठंडी या गर्म तासीर वाली चीजों को चुनते हैं। वहीं कुछ लोगों को तासीर नाम की बला आखिर होती क्या है, इसके बारे में कोई भी जानकारी नहीं होती है।
अब जबकि, सर्दियों का मौसम अपने पूरे शबाब पर है, तो ऐसे में गरम तासीर वाली चीजों का सेवन करना आपके लिए एक बेहतर विकल्प है। ताकि, आप अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर सकें और सर्दियों में होने वाली बीमारियों के साथ-साथ अन्य समस्याओं से भी बचे रहें।

थर्मोजेनेसिस (Thermogenesis) क्या है?
जो खाद्य पदार्थ हम प्रतिदिन खाते हैं उनका हमारे शरीर प्रणाली पर किसी न किसी तरह से प्रभाव पड़ता है, खासकर जब शरीर में गर्मी को बनाए रखने और नियंत्रित करने की बात आती है।
अधिकांश खाद्य पदार्थ जो हम खाते हैं, उनमें शरीर में गर्मी पैदा करने की क्षमता होती है, यह देखते हुए कि उन्हें पचने में कितना समय लगता है, इसलिए पाचन तंत्र को प्रक्रिया को उत्तेजित करने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो आगे चलकर शरीर में गर्मी पैदा करती है।
जब भोजन चयापचय की प्रक्रिया में शरीर के तापमान को बढ़ाता है, तो इसे थर्मोजेनेसिस के नाम से जाना जाता है। थर्मोजेनेसिस तब होता है, जब आपका शरीर ब्राउन फैट बनाने के लिए खाए गये भोजन को तोड़ता है, जिसमें एक विशेष प्रोटीन होता है। जब यह प्रोटीन भोजन के साथ प्रतिक्रिया करता है, तो शरीर में गर्मी पैदा होने का कारण बनता है।
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सर्दियों के गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ
हम रोज़ाना जो कुछ भी खाते हैं, उसका असर हमारे शरीर की कार्य प्रणाली पर अवश्य होता है। खासकर तब, जब बात शरीर में गर्माहट बनाये रखने की हो।
जिन खाने की चीज़ों में, आम तौर पर वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, वे अक्सर खाना पचाते समय शरीर को अधिक गर्म करते हैं।
गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों की एक विस्तृत श्रंखला है। नीचे दिए गए कुछ गरम तासीर वाले मसाले, मेवे, फल और सब्जियों को इस ठंडी के मौसम में अवश्य आजमाएं और फर्क खुद महसूस करें।
गुड़ (Jaggery)

गुड़ को गन्ने से बनाया जाता है, इसमें कैलोरी की मात्रा चीनी के बराबर ही पाई जाती है। इसमें शरीर के लिए जरूरी विटामिंस और मिनरल्स भी मौजूद होते हैं। गुड़ की तासीर गरम होती है।
अध्ययनों से पता चलता है कि यह पाचन में सुधार करता है, लिवर को डिटॉक्सिफाई करता है, एनर्जी बढ़ाता है, खून को साफ करता है और टॉक्सिन्स से लड़ता है।
आयरन का यह प्राकृतिक स्रोत हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है और इसमें विटामिन B और कैल्शियम, जिंक, फास्फोरस और तांबा जैसे खनिज भरपूर मात्रा में होते हैं।
इसलिए इसको सर्दियों में खाना चाहिए गरमी में भी खा सकते हैं, लेकिन काम खाएं। शरीर में गर्मी को बढ़ाने के लिए रोज इसके एक मध्यम आकार का टुकड़ा खाएं, इससे आपके शरीर का तामपान सर्दी में भी सही बना रहेगा।
गुड़ की रोटी, चिक्की, ड्राई फ्रूट के लड्डू, तिल के लड्डू जैसे कई लड्डू या गुड़ को किसी मीठे व्यंजन में भी मिलाकर खा सकते हैं। आजकल गुड़ को स्वास्थ्यवर्धक मीठे के तौर पर भी पेश किया जाता है।
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बाजरा (Bajra)

बाजरा गर्म तासीर का होता है, यह ग्लूटेन-फ्री होने के कारण सर्दियों के लिए एक स्वस्थ आहार है और आपके सर्दियों की खाने की सूची में ज़रूर होना चाहिए।
बाजरा या पर्ल मिलेट ओमेगा-3 फैटी एसिड और मैग्नीशियम, तांबा, मैंगनीज, पोटेशियम, फास्फोरस, कैल्शियम और आयरन जैसे खनिजों का स्रोत है।
बाजरा फाइबर से भरपूर होता है, जिससे यह पाचन और ब्लड शुगर को प्रबंधित करने में मददगार माना जाता है। यह विटामिन A, B से परिपूर्ण बाजरा ऊर्जा और प्रतिरक्षा को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, बाजरा वजन घटाने और दिल की सेहत को बढ़ावा दे सकता है।
सर्दी के मौसम में अगर शरीर में गर्माहट बनाये रखनी है, तो बाजरे की रोटी और दलिया बनाकर खायें। यह सर्दियों के मौसम में खाने के लिए सबसे अच्छे खाद्य पदार्थों में से एक है।
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देशी घी (Clarified butter)

देशी घी सर्दियों के लिए बहुत अच्छा है, ऊर्जा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूर खाना चाहिए, साथ ही आपके शरीर की गर्मी और तापमान को संतुलित करता है।
देशी घी ओमेगा 3 फैटी ऐसिड, विटामिन A और कंजुगेटेड लिनोलिक एसिड जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है।
शोध बताते हैं, कि देशी घी ज़रूरी फैट और एंटीऑक्सीडेंट का भंडार है। यह शरीर को शुद्ध करता है, त्वचा की चमक बढ़ाता है और आँखों के लिए अच्छा है।
देशी घी खाने से कोलेस्टेरॉल नियंत्रण में रहता है, इसका रोजाना इस्तेमाल करने से इम्यूनिटी बढ़ती है और आपका मेटाबॉल्जिम भी सही तरीके से काम करता है।
देशी घी का सही मात्रा में सेवन करने से संपूर्ण स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है, जिससे शरीर में इन्फेक्शन और बीमारियां लगने का खतरा भी कम हो जाता है।
देशी घी, रोटी या पराठे, खिचड़ी, दाल तड़का, पुलाव, हलवा, डोसा, पोंगल, पूरन पोली, लड्डू, उपमा, गाजर का हलवा जैसे कई व्यंजनों का एक ज़रूरी हिस्सा है।
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मेथी (Fenugreek)

मेथी, रसोई की एक जादुई सामग्री है। मेथी एंटी-डायबिटिक है, दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, पाचन में मदद करती है और अपने एंटी-माइक्रोबियल गुणों से इम्यून सिस्टम को बूस्ट करती है, जिससे यह सर्दियों में खाने के लिए एक बेहतरीन गर्म तासीर वाला खाद्य पदार्थ बन जाती है।
यह प्रोटीन का एक बेहतरीन सोर्स होने के अलावा, यह आयरन से भरपूर है – जो 262% DV देता है, आहारीय फाइबर और B विटामिन का भी एक अच्छा स्रोत है।
मेथी दूध पिलाने वाली महिलाओं में दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए जानी जाती है। पिसी मेथी, गेहूं का आटा, गुड़, सूखे मेवे और घी मिलकर बने लड्डू स्वास्थ्य लाभों से भरपूर होते हैं।
अपनी आहार में मेथी को शामिल करने के कुछ और तरीके हैं, मेथी दानों को रात भर भिगोकर खाली पेट खाना या करी और दाल में तड़का लगाने के लिए इस्तेमाल करना। ताज़ी हरी मेथी के पराठे, थेपला, सब्ज़ी या डोसा में डाला जा सकता है, जबकि सूखी पत्तियाँ (कसूरी मेथी) सूप और रसेदार सब्जियों के स्वाद को बढ़ाने का काम बेहतरीन तरीके से करती हैं।
अंडा (Egg)

सर्दियों में अंडों की खपत बढ़ जाती है, क्योंकि यह गर्म तासीर का होता है। अंडों को ऊर्जा का पावरहाउस कहा जाता है। इसको खाने से शरीर में गर्मी का एहसास होता है और स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक होता है।
अंडे में 17 अलग-अलग विटामिन और न्यूट्रिएंट्स होते हैं, जिनमें विटामिन A, D, E, फोलेट, आयरन, सेलेनियम के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट, प्रोटीन और ओमेगा-3 भी शामिल हैं, जो मसल्स, दिमाग और आंखों के लिए फायदेमंद हैं और वज़न कम करने में भी सहायक हैं।
अंडे में ज़्यादातर फैट अनसैचुरेटेड होता है, जिसे हेल्दी फैट माना जाता है। इसीलिए,अंडे खाने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।
अंडे कई तरह के होते हैं, लेकिन सबसे आम पसंद चिकन का अंडा है। अंडे आसानी से पचते हैं, आप अंडे को सुबह नाश्ते में उबालकर या ऑमलेट बनाकर खा सकते हैं या अंडा करी बनाकर खा सकते हैं, जो सबसे बेहतरीन तरीके हैं।
टिप: जो लोग अपने बढ़े वजन को लेकर परेशान हैं, ऐसे लोगों को अंडे का पीला हिस्सा निकालकर खाना चाहिए।
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शहद (Honey)

शहद को एक प्राकृतिक स्वीटनर और गर्म स्वभाव के लिए पर जाना जाता है, जिसे मधुमक्खियां फूलों के रस से बनाती हैं। इसका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों को मीठा बनाने और कई घरेलू उपचार के रूप में, जैसे खांसी शांत करने या घाव ठीक करने में।
शहद में ज़्यादातर चीनी (Fructose) होती है, साथ ही इसमें अमीनो एसिड, विटामिन, मिनरल, आयरन, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट का मिश्रण होता है। शहद को एक एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और जीवाणुरोधी एजेंट के रूप में उपयोग किया जाता है।
शहद में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो त्वचा में निखार लाने, पाचन ठीक रखने, रोग प्रतिकार क्षमता बढ़ाने, वजन कम करने में मदद करते हैं। इसके आलावा, सर्दियों में सर्दी, जुकाम, खांसी, गले में खराश, रूखी त्वचा जैसी बीमारियों से भी बचाव होता है।
शहद खाने के कई तरीके हैं, जैसे खाली पेट गुनगुने पानी, नींबू और शहद मिलाकर पीना (वजन घटाने के लिए), दूध के साथ (वजन बढ़ाने के लिए) या चाय/कॉफी में चीनी की जगह उपयोग करें या इसे दही, स्मूदी और सलाद में मिलाकर खायें; बस ध्यान रहे, कि इसे ज़्यादा गरम न करें और घी के साथ बराबर मात्रा में न लें।
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आंवला (Amla)

आंवला एक गर्म तासीर वाला फल है, जिसमें विटामिन C संतरे की तुलना में आठ गुना अधिक होती है। तो, एंटीऑक्सीडेंट शक्ति अनार की तुलना में लगभग 17 गुना अधिक होती है। इसीलिए आंवले को सुपरफूड भी कहा जाता है।
आंवला नाम संस्कृत शब्द ‘अमलकी’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है “जीवन का अमृत”।
आंवले में पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुण लिवर, दिल, दिमाग और प्रतिरक्षा स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं, साथ ही मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल और एसिडिटी को भी नियंत्रण में रखता है।
आंवले में विटामिन सी अधिक मात्रा में पाया जाता है, जो हमारे प्रतिरक्षा तंत्र, बाल, त्वचा और पाचनतंत्र के लिए फायदेमंद होता है।
सर्दियों के मौसम में आंवला खाना सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है। आयुर्वेद के मतानुसार, आंवला शरीर में तीन दोषों (कफ/वात/पित्त) को संतुलित करके कई मौसमी बीमारियों से लड़ने में मदद कर सकता है।
सर्दी के मौसम में हमें नियमित रूप से च्यवनप्राश, आंवले का जूस और आंवले का मुरब्बा खाना चाहिए। इससे हमारे शरीर में गर्मी बनी रहती है और ठंड बेअसर हो जाती है।
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दालचीनी (Cinnamon)

दालचीनी एक ऐसा गरम मसाला है, जो हजारों वर्षों से अपने बेशकीमती औषधीय गुणों के लिए जाना जाता रहा है। दालचीनी की विशिष्ट गंध और स्वाद इसमें मौजूद सिनामाल्डिहाइड की अधिकता के कारण होती है।
दालचीनी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट में एंटीबायोटिक और सूजन रोधी गुण होते हैं, जो आपके रोग के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
सर्दियों में दालचीनी खाने से शरीर गर्मी पैदा होती है, जिससे आपका मेटाबॉलिज्म (चयापचय) बढ़ता है, और साथ ही वजन भी नियंत्रित रहता है।
दालचीनी आपके भोजन के स्वाद और सुगंध को बढ़ाती के साथ रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में मदद कर सकती है।
सर्दियों में त्वचा के रूखेपन से छुटकारा पाने के लिए, दालचीनी पाउडर में गुलाब जल मिलाकर त्वचा पर लगाने से त्वचा मुलायम और कोमल हो जाती है।
सर्दियों में दालचीनी के काढ़े का उपयोग करने से मौसमी बीमारियाँ जैसे कि सर्दी-खांसी, गले में खराश आदि फ़ौरन से राहत मिलती है।
जायफल (Nutmeg)

जायफल भारत में उगाया जाने वाला एक खुशबूदार गर्म तासीर वाला मसाला है, जो सर्दियों के लिए एकदम सही है। जायफल आमतौर पर अपने स्वाद के लिए जाना जाता है, लेकिन इसमें कई शक्तिशाली कंपाउंड होते हैं, जो आपकी पूरी सेहत पर असर डाल सकते हैं।
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, यह इम्यूनिटी को सपोर्ट करता है और मौसमी इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करता है। जायफल अपनी खुशबू और शांत करने वाले गुणों के लिए भी जाना जाता है, जो ठंडी रातों में नींद को बेहतर बनाने के लिए एक बेहतरीन उपाय है।
इसके अलावा, यह पाचन में मदद करता है और मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, जो खासकर भारी सर्दियों के खाने के बाद बहुत मददगार होता है। स्टार्ची और क्रीमी खाने के साथ इसका खास लगाव होता है।
जायफल का पूरा स्वाद तब सबसे अच्छा लगता है, जब इसे पकाए जाने के बजाय किसी गरम खाद्य पदार्थ पर ताज़ा कद्दूकस किया जाता है।
गर्म दूध में एक चुटकी जायफल डालें या डेज़र्ट बनाते समय या करी बनाने के लिए मसालों के मिश्रण में इसे डालें।
टिप: वैसे तो, जायफल का कोई दुष्प्रभाव नहीं बताए गया है, लेकिन मानसिक समस्या वाले, गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं को जायफल या जावित्री का ज़्यादा इस्तेमाल न करने की सलाह जाती है।
तिल (Sesame)

तिल के बीज विटामिन और प्राकृतिक तेलों का भंडार होते है, जिसमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे खनिज और विटामिन पाए जाते हैं। साथ ही, तिल स्वस्थ वसा का एक बढ़िया स्रोत भी है।
अध्ययनों के अनुसार – तिल में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ट्यूमर प्रभाव होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल कम करना और लिवर, किडनी और दिल के लिए फायदेमंद हैं।
सर्दी में काले और सफेद दोनों तरह के तिल बहुत लाभदायक होते हैं। तिल का तेल एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो बढ़ती उम्र के असर, वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण से हमें बचाता है।
सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के लिये तिल या तिल से बनी चीजों जैसे तिल और गुड़ की चिक्की या तिल और गुड़ के लड्डू का सेवन करना चाहिये
टिप : हृदय रोगी, ब्लड प्रेशर व अस्थमा और मोटापे से परेशान लोगों को तिल से परहेज करना चाहिए। सर्दी-जुकाम होने पर तिल का प्रयोग ना करें, क्योंकि यह कफ के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल को भी बढ़ा देता है।
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खजूर (Dates)

खजूर एक गर्म तासीर वाला फल है, जो अपने मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है और सर्दियों में लोग इसे बड़े चाव से खाते और खिलाते हैं। खजूर में प्राकृतिक शुगर भरपूर होने के कारण, इसे खाने से शरीर में गर्माहट पैदा होती है।
खजूर से अधिकांश कैलोरी कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से मिलती है। खजूर में उच्च कैलोरी होने के अलावा, इसमें आवश्यक विटामिन, खनिज और फाइबर भी होते हैं।
खजूर में विटामिन बी, सी, पोटेशियम, मैग्निशियम, कॉपर, सेलेनियम आयरन प्रचुर मात्रा में होता है। सर्दियों में हमें रोजाना चार से पांच खजूर जरुर खाने चाहिए।
खजूर में फाइबर की अधिकता होने के कारण, यह कब्ज और रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में फायदेमंद हो सकता है। इसमें कई प्रकार के एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं, जो कुछ पुरानी बीमारियों, जैसे हृदय रोग, कैंसर, अल्जाइमर और मधुमेह के विकसित होने से रोकने में मदद कर सकते हैं।
खजूर एक नैचुरल स्वीटनर की तरह काम करते हैं और हड्डियों और दिमाग की सेहत को भी ठीक रखते हैं। हालांकि, ज़्यादा शक्कर होने की वजह से इसे कम मात्रा में खाना ज़रूरी है।
आप खजूर को नाश्ते में खा सकते हैं, या उन्हें स्मूदी और शेक में मिला सकते हैं, या उन्हें काटकर ओटमील, दही, सलाद, या अन्य मेवों के साथ लड्डू बनाकर खा सकते हैं। आसानी से पचने के लिए, खासकर सूखे खजूर, उन्हें रात भर पानी में भिगो दें।
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अदरक (Ginger)

सर्दी के मौसम में सर्दी-जुकाम या खांसी की समस्या बहुत आसानी से आपको अपनी चपेट में ले सकती है। क्योंकि सर्दी के मौसम में शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है।
तब बीमारी या वायरस की चपेट में आने की संभावना भी बढ़ जाती है। इन संक्रमणों से बचाने में अदरक आपकी मदद कर सकती है। क्योंकि अदरक की तासीर गर्म होती है|
सर्दी में अदरक शरीर को गर्म रख सर्दी-खांसी, गले की खराश, जुकाम, फ्लू जैसी बीमारियों से बचाती है। अदरक में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेटस जैसे तत्व होते हैं।
सर्दियों में आप अदरक का उपयोग कई तरीकों से कर सकते है। जैसे अदरक की चाय, अदरक की चटनी, शहद के साथ या फिर सब्ज़ी में मसाले के रूप में मिलाकर खा सकते हैं।
सर्दी के मौसम में कफ की समस्या होना आम बात है। और इससे निजात पाने के लिए आप अदरक के रस में शहद को मिलाकर खायें।
हल्दी (Turmeric)

हल्दी का उपयोग भारत में हजारों वर्षों से एक मसाले और औषधीय जड़ी बूटी दोनों के रूप में किया जाता रहा है। हल्दी सबसे अधिक गर्म तासीर वाली होती है, और करक्यूमिन (Curcumin) यौगिक हल्दी को पीला रंग और औषधीय गुण देता है।
हल्दी में कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे खनिज और विटामिन पाये जाते हैं।
हल्दी एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल जैसे गुणों से समृद्ध होती है, इसलिए हल्दी को सुपरफूड भी कहा जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में, हल्दी के पारंपरिक उपयोगों में से एक है, पाचन में सहायता करना।
आर्थराइटिस फाउंडेशन की शोध के अनुसार, करक्यूमिन सूजनरोधी है और शरीर द्वारा बनाए जाने वाले कई सूजनकारी पदार्थों को रोकता है। हल्दी कैंसर, अल्जाइमर और हृदय रोग के खतरे को कम करने में लाभकारी है।
हल्दी को सब्जी, सूप, खिचड़ी, बिर्यानी जैसे पारम्परिक खाने में रंग और स्वाद के लिए मिलाकर खाएं या रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध बनाकर पियें, इससे शरीर गर्म रहता है और अच्छी नींद भी आती है।
केसर (Saffron)

केसर दुनिया का सबसे महंगा गरम मसाला है, इसका उपयोग भोजन को खास खुशबू, स्वाद और सुनहरा रंग प्रदान करने के लिए किया जाता है।
केसर सिर्फ़ आपके व्यंजनों में डाला जाने वाला एक रंगीन मसाला नहीं है, बल्कि घरेलू उपचार में भी इसका बड़ा महत्व है। इसके पोषक तत्व आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।
सर्दियों में केसर का सेवन करने से हमारी प्रतिरक्षा मजबूत होती है और सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार और फ्लू जैसी बीमारियों से बचाव होता है। केसर की खुशबू एक तनाव निवारक की तरह काम करती है।
केसर में एंटीऑक्सीडेंट, आवश्यक विटामिन और खनिज होते हैं, जो आपके संपूर्ण स्वास्थ्य में योगदान करते हैं। ये पदार्थ कोशिका क्षति को पूरा करने और कैंसर या अन्य बीमारियों को रोकने में सहायक हो सकते हैं।
केसर को चाय या दूध में मिलाकर पीने से ठंड और खांसी से बचने का एक रामबाण उपाय है। केसर का गर्म गुण-धर्म शरीर को गर्म रखने और मौसमी बीमारियों से बचाव में उपयोगी होता है।
बादाम (Almond)

सर्दियों के लिए बादाम गर्म तासीर वाला खाद्य पदार्थ हैं, जो पोषक तत्वों से भरपूर हैं और आपको ठंडे महीनों में स्वस्थ और ऊर्जावान बने रहने में मदद करते हैं।
बादाम ठंड के लिए एक बेहतरीन सूखा मेवा है, जो प्राकृतिक एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर है। इसमें विटामिन ई, जिंक, कैल्शियम, मैग्नीशियम और ओमेगा 3 फैटी एसिड जैसे विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं।
बादाम, विटामिन E और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो त्वचा को पोषण देते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं।
स्वस्थ वसा, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर बादाम शरीर को गर्माहट प्रदान करते हैं और ऊर्जा का स्तर बनाये रहते हैं। तासीर में गर्म होने की वजह से ये सर्दियों की सुस्ती से लड़ने के लिए आदर्श हैं।
ठण्ड से बचने के लिए सर्दियों में सुबह खाली पेट चार से पांच बादाम खायें, आप चाहें तो बादाम शेक या बादाम का हलवा या ड्राई फ्रूट के लड्डू बनाकर भी खा सकते हैं। इससे आपके शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ेगी और बीमारियां आपसे कोसों दूर रहेंगी।
अखरोट (Walnuts)

अखरोट सर्दियों के लिए एक सुपरफूड है, जो पोषक तत्वों और पौष्टिक एनर्जी से भरपूर होता है, जो आपको ठंडे महीनों में स्वस्थ और ऊर्जावान बने रहने में मदद करता है।
अखरोट हेल्दी फैट, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर गर्म तासीर वाला एक मेवा है, जो सर्दियों की सुस्ती से लड़ने और आपकी एनर्जी लेवल को बनाए रखने के लिए एकदम आदर्श हैं।
अखरोट ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट, प्रोटीन और विटामिन का एक बेहतरीन सोर्स हैं, जो दिल और दिमाग के स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं और सूजन को कम करते हैं और आंत की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।
इन्हें सुबह के नाश्ते के रूप में खाएं, गर्म दलिया में मिलाएं, भिगोकर खाएं, सूखे मेवों के लड्डू बनाएं या ऊर्जावान बने रहने के लिए सूखे मेवे से बना पौष्टिक एनर्जी बार खाएं।
सरसों का तेल (Mustard Oil)

सदियों से सरसों का तेल भारतीय रसोई में कई तरह से इस्तेमाल होता रहा है, क्योंकि इसका विशिष्ट स्वाद और खुशबू कई व्यंजनों का जायका बढ़ाता है। सरसों के बीजों का इस्तेमाल मसाले और तेल दोनों के तौर पर किया जाता है।
सर्दियों में सरसों का तेल आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि यह एक गर्म तासीर वाला खाद्य पदार्थ है, जो आपके शरीर को अंदर से गर्म रखता है।
सरसों का तेल, मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (MUFA), पॉलीअनसैचुरेटेड फैट (PUFA) (ओमेगा-3, ओमेगा-6), सैचुरेटेड फैट और विटामिन ई से समृद्ध होता है।
सरसों के तेल को लंबे समय से दिल की सेहत के लिए बेहतर माना जाता है। इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड का संतुलित अनुपात अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।
आयुर्वेद में, सरसों के तेल को कई बीमारियों के लिए एक रामबाण इलाज बताया गया है, जिसमें पाचन और सांस की तकलीफें, जोड़ों का दर्द और त्वचा की दिक्कतें शामिल हैं। इसका गर्म स्वभाव रक्त संचार को बढ़ाने और सूजन कम करने में खास तौर पर फायदेमंद है।
सरसों का तेल भूख को बढ़ाने में सहायता करता है, जिन्हें भूख कम लगती है, वो इस तेल में बनाया भोजन खाना शुरू कर दें। क्योंकि सरसों का तेल पाचन और मेटाबोलिज्म को बढ़ावा देता है।
सरसों के तेल का इस्तेमाल खाना पकाने के कई तरीकों में किया जाता है, जिसमें तलना, भूनना और अचार बनाना शामिल है। साथ ही, इसका इस्तेमाल मैरिनेड और ड्रेसिंग में भी एक अलग स्वाद के लिए किया जाता है।
टिप: खाना पकाने के लिए हमेशा कच्ची घानी सरसों का तेल ही लें, तेज स्वाद, विशिष्ट गंध और रंग गहरा, यही इसके शुद्धता की असली पहचान है।
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अलसी या तीसी (Flaxseed)

अलसी (तीसी) काफी गर्म तासीर की होती है, इसलिए इसका सेवन सर्दियों में ज़्यादा फायदेमंद होता है। सर्दी में अलसी खाने से शरीर को अंदरूनी गर्मी, ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा मिलता है।
अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो सर्दी-जुकाम से बचाते हैं, पाचन में सुधार या कब्ज से राहत और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करते हैं और वजन घटाने में मदद करते हैं, इसके अलावा जोड़ों के दर्द और कमजोरी में भी फायदेमंद है।
अलसी खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकती है, जिससे हृदय रोग का जोखिम कम हो जाता है।
ठंड में अलसी खाने से हमें जबरदस्त फायदे मिलते हैं, लेकिन गर्मियों में सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि ज़्यादा सेवन से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है, जिससे सिरदर्द या त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
अलसी को कच्चा, भून कर या सेंक या दही या ज्यूस में मिलकर ले सकते हैं। अलसी पाउडर को मेवे, गुड़ के साथ मिलाकर लड्डू बनाकर खायें।
टिप: गर्भवती या दूध पिलाने वाली महिलायें और आंत से संबंधित किसी बीमारी से पीड़ित को अलसी के सेवन से बचना चाहिए।
लहसुन (Garlic)

लहसुन में एलिसिन नाम का एक यौगिक होता है, जो लहसुन को कुछ खास बीमारियों में काम करने लायक बनाती है। एलिसिन से ही लहसुन में खास खुशबू आती है।
लहसुन भी एक गर्म तासीर वाला खाद्य पदार्थ होता है। सर्दी के मौसम में हार्ट अटैक का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसा दिल को ऑक्सीजन कम या रुकरुक कर मिलने के कारण होता है। इसलिए सर्दियों में लहसुन खाना सेहत के लिए बेहद आवश्यक है।
लहसुन (एलियम सैटिवम) एक जड़ी-बूटी है और इसका इस्तेमाल आमतौर पर दिल और रक्त परिसंचरण तंत्र से जुड़ी बीमारियों के लिए किया जाता है।
सर्दियों में जब धमनियां सख्त हो जाती हैं और खून का प्रवाह धीमा हो जाता है। ऐसे में लहसुन खाना हृदय रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
आजकल, लहसुन को कई कामों के लिए आहार के पूरक के तौर पर बढ़ावा दिया जाता है, जिसमें हाई ब्लड कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ को नियंत्रित करने में मदद करना; कई तरह के कैंसर को रोकना और प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करना शामिल है।
लहसुन को कच्चा खाने ज़्यादा फ़ायदेमंद है, आप इसे सूप/दाल में तड़का देकर, भूनकर या अचार बनाकर खा सकते हैं। अधिक फायदे के लिए, इसे क्रश करें और थोड़ा देर रुककर खाएं जब एलिसिन के क्रियाशील हो जाये, जबकि हल्का पकाने से फ़ायदे बने रहते हैं, लेकिन ज़्यादा पकाने से वे कम हो जाते हैं।
जड़ वाली सब्जियां (Root Vegetables)

भारत में सर्दियां अपने साथ पोषक तत्वों से भरपूर जड़ वाली सब्जियां लाती हैं, जो शरीर को गर्म और ऊर्जावान रखने के लिए एकदम सही हैं। विशेष रूप से, गाजर और शकरकंद इस मौसम के लिए बेहतरीन विकल्प हैं।
गाजर, बीटा-कैरोटीन से भरपूर होती है, जो विटामिन A में बदल जाती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, साथ ही स्वस्थ त्वचा को बढ़ावा देती है। गाजर सर्दियों के शुष्क मौसम के लिए बहुत फायदेमंद होती है।
शकरकंद, कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और फाइबर का भंडार है, जो विटामिन C प्रदान करता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण घटक है, खासकर सर्दियों के मौसम में। शकरकंद अपने मीठे गुण के कारण ऊर्जा का बड़ा भंडार है, जो मौसमी थकान से लड़ने में मदद करता है।
सर्दियों में मूली, चुकंदर और शलगम जैसी दूसरी जड़ वाली मौसमी सब्ज़ियों को भी अपने भोजन का हिस्सा बनायें, जो आपकी सेहत के लिए बहुत अच्छी हैं।
आप इन्हें मसालों के साथ भूनकर, गर्म सूप में या मिक्स वेजिटेबल के रूप में खा सकते हैं और गाजर का हलवा बनाकर भी खा सकते हैं।
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सर्दियों में गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ सेहत के लिए क्यों ज़रूरी हैं?
सर्दियों में शरीर की भूख बदल जाती है और सर्दियों में खाये जाने वाले गर्म तासीर के खाद्य पदार्थ शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र और सेहत के लिए बेहद आवश्यक हैं।
अदरक, हल्दी और दालचीनी जैसे गर्म मसाले परिसंचरण तंत्र और पाचन को बेहतर बनाते हैं। तो दूसरी ओर, गुड़ और देशी घी, शरीर को गर्म और ऊर्जावान बनाये रखते हैं, जबकि, विटामिन C से भरपूर आंवला, खांसी और जुकाम के खिलाफ प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है।
सर्दियों के दौरान खाये जाने वाले गर्म खाद्य पदार्थ शरीर की मदद कुछ खास तरीके से करते हैं:
- धीरे-धीरे पचने वाले अनाज और स्वस्थ वसा से शरीर में गर्मी पैदा करते हैं।
- फाइबर से भरपूर मेवे और अनाजों से लगातार ऊर्जा को बनाए रखते हैं।
- ताज़ी सब्जियों और जड़ी-बूटियों से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करते हैं।
- गर्म मसाले पाचन में मदद करते हैं, जो पेट के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखता है।
- स्वस्थ वसा और हाइड्रेशन के ज़रिए स्किन और बालों को रुखा होने से बचाते हैं।
सर्दियों में मिलने वाले मौसमी खाद्य पदार्थ खाने के फ़ायदे
मौसम के हिसाब से खाना सिर्फ़ परंपरा ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी अच्छा है। मौसमी खाने में वे पोषक तत्व होते हैं, जिनकी शरीर को साल के उस मौसम में सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। गाजर, मेथी और चुकंदर जैसी सर्दियों की उपज में नैचुरल विटामिन और खनिज होते हैं, जो ताकत और ऊर्जा बढ़ाते हैं।
कुछ खास फ़ायदों में शामिल हैं:
- पोषक तत्वों से भरपूर सब्ज़ियों से रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत होती है।
- धीरे-धीरे पचने वाले और पेट भरा रखने वाले खाने से चयापचय बेहतर होता है।
- मैग्नीशियम से भरपूर अनाज खाने से मूड और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है।
- शरीर को ठंडे तापमान में सक्रिय और ऊर्जावान बनाये रखने में मदद मिलती है।
- मौसमी उपज स्थानीय होने की वजह से मिलने में सरल और सस्ते होते हैं।
आखिरी बात भी बहुत महत्वपूर्ण है…
भारत में सर्दियों के दौरान गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ खाने से न केवल शरीर को पोषण मिलता है, बल्कि शरीर में गर्माहट भी बनाये रखते हैं और इस सर्दी में आपको गर्म रखने के लिए कुछ हेल्दी फ़ूड भी हैं।
सर्दियों के दौरान गर्म तासीर वाला खाना खाने से अच्छी सेहत बनाए रखने, इम्यूनिटी बढ़ाने और शरीर को अंदर से गर्म बनाये रखने में मदद मिलती है। अपने आहार में मौसमी सब्ज़ियाँ, फल, साबुत अनाज, नट्स, डेयरी और गर्म मसाले शामिल करने से सर्दियाँ ज़्यादा मज़ेदार और पौष्टिक बन सकती हैं।
सर्दियों में गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ आपके शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं, तो आप उन्हें अधिक मात्रा में खाने से बचें, नहीं तो, पेट की समस्या भी हो सकती है। स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए अपने खाने पर नियंत्रण रखना जरूरी है।
मौसम के हिसाब से सही खाना चुनने से शारीरिक और मानसिक सेहत अच्छी रहती है। इसलिए यह सुनिश्चित करें, कि आप इस सर्दी के मौसम में स्वस्थ और पौष्टिक खाएंगे, ताकि आप स्वस्थ, गर्म और ऊर्जावान बने रहें।
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